हांसी। महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर ही समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत बनाया जा सकता है। यह संदेश एसडीएम राजेश खोथ ने स्थानीय महर्षि वाल्मीकि मंदिर परिसर में जिला प्रशासन की ओर से आयोजित भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रकटोत्सव समारोह में दिया। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।
एसडीएम ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। महापुरुषों के विचारों का सम्मान तभी सार्थक है, जब उन्हें पूजा-अर्चना तक सीमित न रखकर अपने आचरण में भी अपनाया जाए। उनके आदर्शों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने पर विशेष जोर दिया। कहा कि बच्चों को बार-बार टोकने या उनकी गतिविधियों पर अनावश्यक रोक लगाने के बजाय सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने देना चाहिए। इससे उन्हें महापुरुषों के विचारों और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है।
एसडीएम ने कहा कि आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारा समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। व्यक्ति की सफलता में परिवार, साथियों, पड़ोसियों और समाज का महत्वपूर्ण योगदान होता है। एक-दूसरे का साथ मिलने से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने लोगों से दूसरों की कमियों के बजाय उनकी अच्छाइयों से सीखने की अपील की।
खोथ ने शिक्षा और निरंतर सीखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीखने-पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। किसी पुस्तक का एक पन्ना या उसमें लिखी अच्छी बात भी जीवन को नई दिशा दे सकती है। प्रत्येक कार्यक्रम से कुछ सीखकर लौटना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। उन्होंने बच्चों की शिक्षा, अच्छे संस्कारों और सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि समाज हांसी के प्रधान राजकुमार ने एसडीएम राजेश खोथ को महर्षि वाल्मीकि का चित्र स्मृति चिह्न के रूप में भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर महेंद्र कांगड़ा, भीमसेन फौजी, सुभाष प्रधान, शिवकुमार, रिंकू, राजेंद्र, अजय निर्भय, अभय राम, वजीर सिंह आदि माैजूद रहे।