हिसार। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बैठने की सुविधा बेहतर करने के लिए शिक्षा विभाग ने ड्यूल डेस्क उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में हुए सर्वे के आधार पर उन स्कूलों को चिह्नित किया गया है जहां विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले फर्नीचर की कमी है।
अब विद्यार्थियों की संख्या और स्कूल में पहले से उपलब्ध डेस्क की स्थिति के आधार पर नए ड्यूल डेस्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि नवंबर तक पात्र स्कूलों में डेस्क पहुंचा दिए जाएं।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक सर्वे करवाया था। इसमें विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था, फर्नीचर की उपलब्धता समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं की जानकारी जुटाई गई। सर्वे में सामने आई कमियों के आधार पर ड्यूल डेस्क की खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे उन स्कूलों को राहत मिलेगी जहां पर्याप्त फर्नीचर नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी होती है।
बीईओ राकेश चराया ने बताया कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। ड्यूल डेस्क मिलने से विद्यार्थियों की बैठने की व्यवस्था बेहतर होगी और उन्हें सुविधा मिलेगी।
विद्यार्थियों की संख्या होगी मुख्य आधार
ड्यूल डेस्क उपलब्ध करवाने में स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या को मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसके साथ ही पहले से उपलब्ध फर्नीचर की स्थिति भी देखी जाएगी। जरूरत के अनुसार डेस्क उपलब्ध करवाकर प्रत्येक विद्यार्थी के लिए बैठने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे कक्षाओं में बैठने की व्यवस्था अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित होगी। ड्यूल डेस्क की उपलब्धता को लेकर विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। इसमें पात्र स्कूलों को डेस्क उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
डिजिटल निगरानी से होगी पारदर्शी आपूर्ति
शिक्षा विभाग ने ड्यूल डेस्क के वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष व्यवस्था की है। नए डेस्क सरकारी पोर्टल के माध्यम से पंजीकृत पात्र स्कूलों में सीधे भेजे जाएंगे, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। लंबे समय से कई सरकारी स्कूलों में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। सर्दियों में ठंड के कारण उनकी उपस्थिति भी प्रभावित होती थी। ड्यूल डेस्क मिलने से कक्षाओं की व्यवस्था सुधरेगी और विद्यार्थियों के स्वास्थ्य व पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का रुझान बढ़ने की भी उम्मीद है।