जिला पुलिस के पास 18 लाख की आबादी के लिए सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है। पुलिस के पास न तो आवश्यकता के हिसाब से फोर्स है और न ही अपराधियों के पीछे दौड़ाने के लिए पीसीआर व राइडर। जिले भर की आबादी के लिए केवल नाममात्र व्हीकल हैं।
अगर आंकलन किया जाए तो एक लाख से अधिक की आबादी के लिए केवल एक ही पीसीआर है। इसके अलावा एक पीसीआर के साथ दो ही राइडर हैं। जिले में हांसी व हिसार के शहरों में क्राइम का ग्राफ काफी बढ़ा हुआ है। पुलिस अधिकारियों की मानें तो पूरे जिले में 17 पीसीआर व 34 राइडर हैं, लेकिन आवश्यकता लगभग दो गुना से अधिक की हं।
पुलिस के अनुसार हिसार में कुल 8 पीसीआर है। जबकि शहर में सिटी व सिविल लाइन दो थाने हैं। शहर की आबादी भी साढ़े तीन लाख से ज्यादा है। हांसी में भी हाल ऐसा ही है। हांसी सिटी में 4 पीसीआर लगाई गई हैं।
जिले में महिलाओं की आबादी साढ़े आठ लाख से अधिक है। अक्सर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ व रेप की घटनाएं बढ़ रही है। शहर में महिलाओं से चेन स्नेचिंग, पर्स स्नेचिंग सहित आपराधिक मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए केवल एक महिला पीसीआर लगाई गई है।
बरवाला उकलाना नारनौंद व आदमपुर में केवल पांच पीसीआर
पुलिस ने बरवाला उकलाना नारनौंद आदमपुर के लिए पांच पीसीआर तैनात की है। शहर के साथ लगते आउटर एरिया में अक्सर चोरी की वारदात होती रहती है। एक पीसीआर के साथ दो राइडर हैं।
पुलिस के पास जितने संसाधन उपलब्ध हैं, उनका बेहतर प्रयोग किया जा रहा है। पुलिस का हर संभव प्रयास आम जन की सुरक्षा का है। जिला पुलिस प्रशासन भविष्य में पीसीआर व राइडर की संख्या बढ़ाएगा भी। फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है।