कोरोना महामारी के चलते लगभग सभी उद्योग धंधे चौपट होने की कगार पर थे। देश की अर्थव्यवस्था डगमगा रही थी। इस संकट की घड़ी में केवल किसान की मेहनत ने ही देश की अर्थव्यवस्था को बचाने में अहम भूमिका निभाई। यह बात प्रदेश के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने बुधवार को एचएयू द्वारा आयोजित देश के दूसरे व प्रदेश के पहले वर्चुअल मेले के शुभारंभ अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि कही। उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे ऐसी उन्नत किस्मों के बीज व तकनीक को विकसित करें, जिससे किसानों की प्रति एकड़ आय एक से डेढ़ लाख रुपये हो सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि छोटी जोत वाले किसान कई बार आधुनिक तकनीकों व मशीनरियों के खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं होते, इसलिए वे किसान समूह बनाकर खेती करें, जिससे उन्हें और अधिक लाभ मिल सके। इससे पहले उन्होंने कार्यक्रम के मुख्यातिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के संदेश को किसानों के लिए पढ़ा। मुख्यमंत्री किसी कारणवश कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे। मेले का मुख्य विषय ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ रखा गया है। इस दौरान किसान एप का भी उद्घाटन किया गया, जिसके माध्यम से किसान विश्वविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न फसलों व सब्जियों के बीजों की उन्नत किस्मों के बीज बुक कर सकते हैं।
वर्चुअल मेले का लाभ उठाएं किसान : प्रो. समर सिंह
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएय) के कुलपति प्रो. समर सिंह ने कहा कि इस संकट की घड़ी में फिजिकली मेले का आयोजन बहुत ही कठिन कार्य था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठापूर्वक कार्य करते हुए किसानों के हित को ध्यान में रखकर वर्चुअल कृषि मेला आयोजित किया है। उनका मुख्य लक्ष्य है कि हर किसान तक विश्वविद्यालय की उन्नत किस्मों व तकनीकों का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने इस दौरान मेले के मुख्य थीम ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ पर भी अपने विचार रखे।
विश्वविद्यालय के 17 पेटेंट को मिली स्वीकृति
कुलपति ने कहा कि अब तक विश्वविद्यालय ने फसलों की 255 नई व उन्नत किस्मेें विकसित की हैं, जो रोग प्रतिरोधी व अधिक पैदावार देने वाली हैं। अब तक 527 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एमओयू साइन हो चुके हैं। इसके अलावा 43 पेटेंट विश्वविद्यालय की ओर से आवेदन किए गए हैं, जिसमें 17 की स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि देश के खाद्यान्न भंडारण में प्रदेश दूसरे स्थान पर है और अकेला हरियाणा प्रदेश देश का 60 प्रतिशत बासमती का उत्पादन करता है, जो अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम में ये रहे शामिल -
वर्चुअल कृषि मेले के शुभारंभ अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह, आईएएस, लुवास के कुलपति डॉ. गुरदयाल सिंह, एचएयू के कुलसचिव डॉ. बीआर कंबोज, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आरएस हुड्डा, अनुसंधान निदेशक डॉ. एसके सहरावत, डॉ. एमएस सिद्धपुरिया, डॉ. आरके झोरड़, विश्वविद्यालय के प्रबंधन मंडल की सदस्य सुदेश चौधरी, डॉ. सीमा रानी, विस्तार शिक्षा निदेशालय के सह-निदेशक (किसान परामर्श केंद्र) डॉ. सुनील ढांडा सहित सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के इंचार्ज व देश व प्रदेश के किसानों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन रूप से शामिल हुए।
पहले दिन तक 30 हजार किसानों ने किया पंजीकरण
विस्तार शिक्षा निदेशालय के सह-निदेशक (किसान परामर्श केंद्र) डॉ. सुनील ढांडा ने बताया कि इस वर्चुअल कृषि मेले के लिए करीब 30 हजार किसान अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण करवा चुके हैं। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर करीब 50 हजार से ज्यादा किसान इस मेले को लेकर अभी तक विजिट कर चुके हैं। वर्चुअल कृषि मेले के दूसरे सत्र में ‘फसल अवशेष प्रबंधन’ विषय सहित पशुओं में बांझपन की समस्या विषय पर वेबिनार आयोजित किए गए।