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Hisar News: सतेंद्र कोथ बने भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान, गांव राखी बारह खाप के चबूतरे पर हुई बैठक

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नारनौंद। गांव राखी बारह खाप के चबूतरे पर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) की जिला कार्यकारिणी के विस्तार के लिए बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता जोगीराम लौरा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष रतन मान मौजूद रहे। इस दौरान किसानों की मौजूदगी में नई कार्यकारिणी का गठन सर्वसम्मति से किया गया। सतेंद्र कोथ को जिला प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी।
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प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि यूनियन हमेशा किसानों के हक की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी मजबूती से लड़ती रहेगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों के मुद्दों को अनदेखा किया गया, तो संगठन आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिजली बिल, फसल खरीद, और एमएसपी जैसे अहम मुद्दों पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
रतन मान ने कहा कि संगठन तभी मजबूत बनता है, जब उसमें ईमानदार, निष्ठावान और जिम्मेदार कार्यकर्ता शामिल हों। उन्होंने नई टीम को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने और संगठन का विस्तार गांव-गांव तक करने का आह्वान किया।
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नई कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारी
जिला प्रधान : सतेंद्र कोथ
जिला संरक्षक : कुलदीप खरड़
उप प्रधान : जोगीराम लौरा, सुनील बूरा, सतेंद्र श्योराण, सुमेर कुंडू
जिला महासचिव : दीपक मोर
कोषाध्यक्ष : सुरजमल ढांड
मीडिया सचिव : अजय कोथ
प्रचार मंत्री : बलजीत अहलावत
सचिव : प्रवेश राजली
प्रवक्ता : अनिल बैंदा काबरेल
इसके अलावा रणधीर मिलकपुर, कृष्ण ढांड, और ओमप्रकाश फौजी को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल किया गया।
बाढ़ और मुआवजे पर सरकार को चेतावनी
प्रदेश में हाल ही में आई बाढ़ से हुए नुकसान पर चिंता जताते हुए रतन मान ने कहा कि सरकार को किसानों की भरपाई के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके लिए संगठन द्वारा व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है।
प्रदेशस्तरीय संगठन में हो चुका है पुनर्गठन
रतन मान ने बताया कि 22 जून को जींद के किसान भवन में आयोजित प्रदेश स्तरीय पंचायत में राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी प्रकोष्ठ और जनरल बॉडी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद से विभिन्न जिलों में नई कार्यकारिणी गठित की जा रही हैं। अब तक जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला और पंचकूला की इकाइयां बनाई जा चुकी हैं। बैठक में शामिल किसानों ने नई कार्यकारिणी का स्वागत किया और संगठित होकर किसानों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो वे आंदोलन के रास्ते पर भी जाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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