हिसार। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध से खारकीव शहर में हालात खराब है। जिस हॉस्टल की बेसमेंट में भारतीय विद्यार्थी फंसे हैं, उससे 200 मीटर की दूरी पर रूसी और यूक्रेन के सैनिकों के बीच आमने-सामने की लड़ाई चल रही है।
नागरिक अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स लक्ष्मी के बेटे अंशुमन ने बताया कि हॉस्टल के बाहर और अंदर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। यहां पर फंसे विद्यार्थियों को यहीं चिंता सता रही है कि अगर, सैनिक बेसमेंट में आए तो क्या होगा। खारकीव में फंसे विद्यार्थियों का कहना है कि हॉस्टल से मेट्रो स्टेशन का रास्ता दस मिनट का है लेकिन लगातार हो रही बमबारी के कारण वहां तक नहीं जा सकते।
वहीं सोमवार सुबह कीव शहर में फंसे विद्यार्थियों का एक दल हंगरी के लिए रवाना हुआ। मंगलवार सुबह तक वे हंगरी बॉर्डर पहुंच जाएंगे। उम्मीद है कि जल्द ही वह वतन लौट आएंगे। कीव से लौट रही छात्रा खुशी ने बताया कि तीन-चार ट्रेन बदलकर हम 1200 किलोमीटर दूर हंगरी पहुंचेंगे। अभिभावकों का कहना है भूख-प्यास से बच्चे तड़प रहे, भारतीय एंबेसी न मदद कर रही न ही फोन उठा रही है। सरकार से बच्चों को जल्द घर वापसी की गुहार लगाई जा रही है।
फाइटर जेट की आवाजों से दहशत में : अंशुमन
अंशुमन ने बताया कि अब राशन भी खत्म होने की कगार है इसलिए हमें एक समय ही खाना दिया जा रहा है। लगातार हॉस्टल के पास बमबारी हो रही है। फाइटर जेट की आवाजों से दहशत में हैं। दूतावास की तरफ से अभी तक कोई मदद नहीं पहुंचाई गई। यहां से कब निकलेंगे कुछ पता नहीं। जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ रहा है यहां फंसे सभी विद्यार्थियों की हालत खराब होते जा रहे हैं। जो रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे हैं वहां से खबर आ रही है कि वहां के सैनिक भारतीय के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
बमबारी से निकले तो बर्फबारी में फंसे छात्र
यूक्रेन के ओडेसा शहर से निकलकर जो भारतीय छात्र रोमानिया व पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे थे वे अब भी वहीं पर फंस हैं। बमबारी से दूर आए तो अब वह बर्फबारी में फंस गए हैं। हिसार के अमरदीप भी इन्हीं छात्रों में शामिल हैं। अमरदीप कल दोपहर 1 बजे रोमानिया बॉर्डर पर पहुंच गया था। अब तक उन्हें रोमानिया में प्रवेश करने नहीं दिया है। अमरदीप के पिता सत्यवान ने बताया कि दो दिन से अमरदीप के साथ कोई संपर्क नहीं हो रहा है।
सता रही है बेटे की चिंता
सैनिक छावनी के बाहर बसी एक कॉलोनी में रहने वाले रमेश सूबेदार ने बताया कि उनका बेटा कपिल यूक्रेन के खारकीव में फंसा है। वह चार साल से वहां एमबीबीएस कर रहा है। कोरोना के चलते एक साल से वह घर नहीं आया। वह हॉस्टल की बेसमेंट में बाकी विद्यार्थियों के साथ है। बेटे से लगातार बात हो रही है, लेकिन उसकी सुरक्षा की चिंता सता रही हे। कल काफी बमबारी हुई थी। सरकार भी कोई मदद नहीं कर रही है। हम सभी के सकुशल वतन वापसी की दुआ कर रहे हैं।
बेटी तीन सहेलियां के साथ बंकर में है, पांच दिन का बचा राशन
गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी के डिस्टेंस एजुकेशन निदेशक डॉ. ओपी सांगवान की बेटी सोनिया सांगवान खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रही है। सोनिया द्वितीय वर्ष की छात्रा है। डॉ. ओपी सांगवान ने बताया कि उन्हें अपनी बेेटी की चिंता सता रही है। 12 मार्च की टिकट बुक थी। फ्लाइट रद्द हो चुकी है। बार-बार फोन करके बेटी से बात कर रहे हैं व उसका हौसला बढ़ा रहे हैं। सोमवार को जब डॉ. ओपी सांगवान ने अपनी बेटी से बातचीत की तो वो भावुक हो गए। सोनिया सांगवान खारकीव शहर में अपने फ्लेट के बंकर में है। उसके साथ उनकी तीन सहेलियां भी हैं। 15 दिन का राशन लिया था, 5 दिन का राशन शेष है। डॉ. ओपी सांगवान ने बताया कि अगर नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा ऑनलाइन क्लास लगाने की घोषणा पहले ही कर दी जाती तो आज हमारे बच्चे हमारे साथ होते।
मेट्रो ट्रेन में पहले में यूक्रेनी चढ़ेंगे फिर भारतीय : अमन
खारकीव शहर में फंसे पाबड़ा गांव के अमन ने बताया कि खारकीव शहर से निकलने के लिए मेट्रो ट्रेन चला दी है। ये मेट्रो ट्रेन नजदीकी देशों के बॉर्डर पर छोड़ेगी। अमन ने बताया कि मेरे हॉस्टल से नेक्सट मेट्रो स्टेशन का सिर्फ 10 मिनट पैदल का रास्ता है, लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे में मेट्रो स्टेशन पर जाना अपनी जान जोखिम में डालने के बराबर है। अमन ने बताया कि भारतीय दूतावास से किसी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है। मेट्रो ट्रेन में पहले यूक्रेन के लोग सवार होंगे उसके बाद भारतीयों को चढ़ाया जाएगा।