इस बार प्रदेश में गेहूं, जौ व चने की बंपर पैदावार की उम्मीद है। फिलहाल मौसम अनुकूल बना हुआ है। मानसून में अधिक बारिश होने से हवा में बनी नमी और कोहरा छाने से फायदा मिल रहा है। हालांकि सरसों की फसल पर मौसम का हल्का प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि तापमान कम रहने और कोहरा छाने से गेहूं की फसल की अच्छी बढ़वार और फुटाव होगा।
आने वाले दिनों में हल्की बारिश की भी संभावना है। बारिश गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी। जौ और चने की पैदावार भी इस बार अच्छी रहेगी। पाला काफी जम रहा है, क्योंकि न्यूनतम तापमान एक सप्ताह तक एक से तीन डिग्री के आसपास रह रहा है। आने वाले दिनों में बारिश होती है तो नमी बढ़ने से सरसों में फफूंदी रोग आ सकता है, जिसका असर पैदावर पर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की बेहतरीन बढ़वार के लिए 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। हालांकि इस बार तापमान थोड़ा नीचे रहा है लेकिन सरसों में ज्यादा नुकसान नहीं है। वहीं, आगामी दिनों में तापमान ज्यादा बढ़ने के आसान नहीं है इससे दाने का साइज भी बड़ा होगा और दानों में तेल की प्रतिशत मात्रा में वृद्धि होगी। ठंड बने रहने से माहू (एफिड) जैसे हानिकारक कीड़ों का प्रकोप भी नहीं रहेगा और कीटनाशक छिड़काव पर भी अधिक खर्चा नहीं करना पड़ेगा।
गेहूं की फसल अभी शुरुआती चरण में है। कृषि विज्ञानियों के अनुसार रात का तापमान 8 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तो बालियों में दाने का भराव ठोस और वजनदार होता है। इस बार ऐसा ही मौसम बना हुआ है। ठंड के कारण गेहूं के पौधों में टिलरिंग यानी जड़ों का फैलाव अच्छा होता है। तापमान बढ़ने से बालियां जल्दी आने का खतरा रहता है और गेहूं का दाना पिचक सकता है, लेकिन इस बार फसल में हीट स्ट्रेस नहीं है। हवा में नमी की मात्रा ज्यादा है। गेहूं की फसल में बालियां समय पर ही आएंगी और बंपर पैदावार की उम्मीद है।
गेहूं 5.5 लाख एकड़
सरसों 2.25 लाख एकड़
जौ 35000 एकड़
चना 2500 एकड़