हिसार। दिन-रात के बढ़ते औसत तापमान से गेहूं की फसल प्रभावित होने की आशंका है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर फरवरी-मार्च में औसत तापमान सामान्य से अधिक रहने के आसार जताए हैं। इस लिहाज से प्रदेश के 24.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की पैदावार कैसी होगी, यह फरवरी और मार्च के औसत तापमान पर निर्भर करेगा। प्रदेश में अभी औसत तापमान 17-18 डिग्री सेल्सियस के बीच है, लेकिन एक सप्ताह में इसमें 3.6 डिग्री की बढ़ोतरी चिंताजनक है। उधर, मौसम विभाग ने 9 फरवरी को हल्की बारिश के आसार जताए हैं। इससे तापमान में गिरावट आ सकती है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अच्छी पैदावार के लिए औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए। इसमें एक डिग्री का भी उछाल आता है और यह स्थिति 7-10 दिन तक रहती है तो गेहूंं की पैदावार में 6 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। ऐसे में तापमान को नियंत्रित करने के लिए किसानों को हल्की सिंचाई और फसल में पोटाशियम सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए। दरअसल फरवरी के पहले सप्ताह में औसत तापमान एकाएक बढ़ने से कृषि वैज्ञानिकों और किसानों की चिंता बढ़ी है। अभी दिन का अधिकतम व न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में शुक्रवार को जोनल रिसर्च एक्सटेंशन एक्शन कमेटी की बैठक में कृषि उप निदेशकों ने फरवरी के पहले सप्ताह में तापमान में तेजी से आए उछाल पर चिंता जताई। एचएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जोन के जिलों के कृषि उप निदेशक और एचएयू के वैज्ञानिक शामिल हुए।
तापमान में यूं आ रहा अंतर
एक फरवरी को न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री था जो 7 फरवरी को 9.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। एक फरवरी को अधिकतम तापमान 21.7 डिग्री दर्ज किया गया जो 7 फरवरी को 24.4 डिग्री तक पहुंच गया। एक फरवरी को दिन का औसत तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रहा था जो सात फरवरी को 3.6 डिग्री बढ़कर 16.8 तक पहुंच गया। न्यूनतम तापमान में एकदम उछाल से औसत तापमान बढ़ रहा है।
गेहूं में इस समय दाना बनने की प्रक्रिया चल रही है जिसे मिल्की स्टेज कहा जाता है। इस वक्त तापमान की बड़ी भूमिका रहती है। औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से कम रहना चाहिए। अभी अधिकतम तापमान सामान्य से 2 और न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस ज्यादा चल रहा है। नौ फरवरी को हल्की बारिश के आसार हैं। इससे तापमान में गिरावट की संभावना है।
- डॉ. ओपी बिश्नोई, वरिष्ठ गेहूं वैज्ञानिक, एचएयू हिसार
वैज्ञानिक मौसम विभाग से लगातार संपर्क कर स्थिति का आकलन कर रहे हैं। फिलहाल चिंता की बात नहीं है। तापमान में एक -दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से अधिक प्रभाव नहीं होगा। यह स्थिति लंबे समय तक रहती है तब नुकसान की आशंका है। किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए। - प्रो. बीआर कांबोज, कुलपति, एचएयू
गेहूं बिजाई का रकबा (2025-26)
प्रदेश क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में)
उत्तर प्रदेश 94.13
मध्यप्रदेश 85.73
राजस्थान 35.49
पंजाब 34.89
हरियाणा 24.48
बिहार 19.92
गुजरात 13.24
महाराष्ट्र 11.49
हरियाणा में गेहूं की पैदावार (लाख टन में)
वर्ष पैदावार
2019-20 118
2020-21 123
2021-22 104
2022-23 110
2023-24 124
2024-25 125