वर्कशॉप में खड़ीं पिंक मिनी बसें। संवाद
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हिसार। एंबुलेंस में तबदील पिंक मिनी बसों को अभी सामान्य नहीं किया जाएगा। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के तहत रोडवेज जीएम ने यह निर्णय लिया है। ऐसे में बेटियों को अभी इन बसों की सुविधा लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल बसें वर्कशॉप में धूल फांक रही हैं। वहीं इनमें से दो बसों को फ्लाइंग चेकिंग की ड्यूटी में प्रयोग किया जा रहा है।
बता दें कि करीब पौने दो साल पहले हिसार और हांसी सब डिपो को पिंक मिनी बसें मिली थीं। ये बसें स्पेशल बेटियों के लिए चलाई जानी थीं। बस आने पर शुरू में रूट चार्ट नहीं बन पाए। फिर कोरोना के कारण इन बसों पर ब्रेक लग गए। ऐसे में बेटियों को बस की सुविधा नहीं मिल पाई है। छात्राओं को बसों के लिए काफी परेशानी सहनी पड़ रही है। हांसी में छात्राओं ने बस की समस्या को लेकर शुक्रवार को रोड जाम कर अपना आक्रोश जाहिर किया था। इसी सप्ताह अग्रोहा में भी छात्राओं ने बस का घेराव करते हुए उसे एक घंटे तक रोके रखा था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद बस को जाने दिया गया था।
हिसार और हांसी सब डिपो को मिली थीं 9 बसें
हिसार और हांसी सब डिपो को 9 पिंक मिनी बसें मिली थीं। इनमें से पांच बसें हिसार और दो बसें हांसी सब डिपो को दी गई थीं। कोरोनाकाल में प्रशासन के आदेश आने के बाद इनमें से पांच बसों को एंबुलेंस में तबदील कर दिया गया। हालांकि इन एंबुलेंस का प्रयोग भी कम हुआ। फिलहाल ये बसें वर्कशॉप में खड़ी की हुई हैं।
कभी भी पड़ सकती है जरूरत
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अभी इन बसों को सामान्य नहीं किया जाएगा। एंबुलेंस में तबदील इन बसों की कभी भी जरूरत पड़ सकती है।
- राहुल मित्तल, महाप्रबंधक, हिसार डिपो।