हिसार। मां केवल एक रिश्ता नहीं बल्कि जीवन की सबसे बड़ी ताकत और पहली पाठशाला होती है। मां की डांट में चिंता, त्याग में ममता और हर सीख में बच्चों का उज्ज्वल भविष्य छिपा होता है। बचपन में मां की टोका-टोकी कई बार कठोर लगती है लेकिन समय के साथ वही बातें जीवन की सबसे बड़ी सीख बन जाती हैं। शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत मातृ दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में नारायणी वेल्फेयर सोसायटी से जुडे़ पदाधिकारियों और सदस्यों ने मां के जीवन संघर्ष पर कुछ इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं।
निशा भ्याना, पूनम, पारूल और बिमला ने मां के संघर्ष को याद किया और उनकी खामोशी में छिपे प्रेम को महसूस किया। कांता, उर्मिल, ऊषा, श्रुति गोयल और डॉ. शुभम ने कहा कि मां बच्चों को केवल बड़ा नहीं करती बल्कि उन्हें जिम्मेदार, मजबूत और संवेदनशील इंसान भी बनाती हैं। कार्यक्रम के दौरान कई भावुक पल भी आए जब महिलाओं ने अपनी मां के त्याग, संघर्ष और निस्वार्थ प्रेम को याद किया। बिजनेस वुमन अर्चना ने कहा कि वह 11वीं कक्षा से ही हॉस्टल में रही। घर से वापस हॉस्टल जाती तो मम्मी हमेशा कहती थीं कि एक-दो दिन और रुक जा। उस समय लगता था कि मम्मी बेवजह भावुक हो रही हैं लेकिन जब मैं खुद मां बनी और मेरी बेटी पहली बार स्कूल गई तब मुझे एहसास हुआ कि बच्चे के दूर जाने पर मां कैसा महसूस करती है। शिक्षिका संगीता गोयल ने कहा कि मां मुझे डॉक्टर बनना चाहती थीं लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उनका सपना अधूरा रह गया। मेरे बेटी हुई तो मां ने वादा लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए अपने बच्चों के सपनों को अधूरा मत छोड़ना। मैंने मां और खुद का सपना अपने बच्चों के जरिए पूरा किया। मेरे दोनों बच्चे डॉक्टर हैं।
समाज सेविका सीमा चौहान ने बताया कि जब मैं कॉलेज जाती थी तो मां मुझे गेट तक छोड़ने आती थीं और वापसी तक इंतजार करती थीं। घर पहुंचते ही सबसे पहले पूछती थीं कि कुछ खाया या नहीं। आज भी जब मैं घर जाती हूं तो मां उसी तरह गेट पर इंतजार करती मिलती हैं। बचपन में उनकी टोका-टोकी बुरी लगती थी लेकिन अब समझ आता है कि मां हर बात बच्चों की भलाई के लिए ही कहती है।
दसवीं कक्षा के एग्जाम चल रहे थे लेकिन रात का खाना बनाना मेरी जिम्मेदारी थी। एक दिन पापा ने मम्मी से कहा कि इसके एग्जाम चल रहे हैं। इससे काम मत करवाओ। मम्मी ने जवाब दिया कि क्या इसे सिर्फ उन पंद्रह मिनट में ही पढ़ना है। बाकी समय क्या करेगी। उस समय उनकी बात शायद समझ नहीं आई लेकिन आज महसूस होता है कि मां मुझे जिम्मेदारी निभाना सिखा रही थीं। मां की सीख हमेशा याद रही कि समय खुद मैनेज करना पड़ता है। -डॉ. गुंजन गोयल, संस्थापक अध्यक्ष, नारायणी वेल्फेयर सोसायटी
-
मेरी मां बहुत शांत और सहनशील स्वभाव की थीं। रोज सुबह साढ़े तीन बजे उठकर पूरे परिवार का खाना तैयार करती थीं। उनका सिर्फ इतना काम होता था कि नहाकर आने तक मैं उनके लिए एक गिलास दूध बनाकर रख दूं। एक दिन मैं भूल गई और मम्मी बिना कुछ कहे चली गईं। उनकी खामोशी मुझे आज तक याद है। अब जब मैं खुद मां बनी हूं तो समझ आता है कि उस दिन मम्मी को कैसा लगा होगा। -डॉ. करूणा, प्रोफसर
-
मां शब्द अपने आप में सबसे बड़ा इमोशन है। जिंदगी में मुश्किल समय में कोई बिना शर्त साथ खड़ा रहता है तो वह मां ही होती हैं। मां का प्यार किसी स्वार्थ पर आधारित नहीं होता। वह बच्चों की हर परेशानी को खुद की परेशानी मानती हैं। कई बार हम बड़े होकर अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाते हैं लेकिन मां की दुआएं हमेशा साथ रहती हैं। मुझे लगता है कि दुनिया में मां से बड़ा कोई रिश्ता नहीं है। -मोनिका वर्मा, बिजनेस वुमेन
-
मेरा अस्तित्व एक इमारत है तो उसकी नींव मेरी मां हैं। उन्होंने हर मुश्किल समय में मेरा साथ दिया और हर संघर्ष में मुझे संभाला। जब भी मैं निराश हुई मां ने मुझे हिम्मत दी। मां केवल घर संभालने वाली महिला नहीं होती, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने वाली सबसे बड़ी ताकत होती है। आज मैं जो भी हूं, उसमें मेरी मां के संस्कार और मेहनत का सबसे बड़ा योगदान है। -शालू, शिक्षिका
मैं बचपन में खाने को लेकर बहुत जिद्दी थी। मेरी पसंद का खाना नहीं बनता था तो नाराज होकर कमरे में चली जाती थी। तब मम्मी मेरे लिए अलग से कुछ बनाती थीं और हमेशा कहती थीं कि जब खुद मां बनेगी तब समझ आएगा। आज जब मैं खुद मां हूं तो उनकी हर बात याद आती है। अब महसूस होता है कि मां कितने धैर्य और प्यार से बच्चों को संभालती है। मां का कर्ज कभी नहीं चुकाया जा सकता।- मनीषा सिंह, प्राचार्या
-
पैरेंट्स अक्सर शिकायत करते हैं कि बच्चे जिम्मेदार नहीं बन रहे और हर समय मोबाइल में लगे रहते हैं। मुझे लगता है कि इसका कारण यह है कि आज बच्चों को हर सुविधा आसानी से मिल जाती है। हमारे समय में मां हमें छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देती थीं, जिससे काम संभालना और समय मैनेज करना आता था। बच्चों को हर चीज तैयार मिलेंगी तो वे जीवन की चुनौतियों को समझ नहीं पाएंगे। -अंजू भूटानी, शिक्षिका