संवाद न्यूज एजेंसी
हांसी। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4सी) ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) शुरू किया है। इसका उद्देश्य साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को राहत देना है। इस नई व्यवस्था से जांच के दौरान फ्रीज की गई राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस दिलाई जा सकेगी।
पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत से ठगी गई राशि को फ्रीज करने की संभावना बढ़ जाती है। शिकायत के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियां और बैंक एमआरएम प्रणाली से धोखाधड़ी की राशि का पता लगाते हैं। यदि राशि सुरक्षित हो जाती है तो पीड़ित एमआरएम पोर्टल पर लॉग इन कर वापसी का अनुरोध कर सकता है। 50 हजार रुपये से कम की फ्रीज राशि के लिए न्यायालय के आदेश की आवश्यकता नहीं होती। जबकि अधिक राशि के लिए यह आवश्यक है।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने ग्रीवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम) पोर्टल भी शुरू किया है। यह उन खाताधारकों के लिए है जिनके खाते गलती से फ्रीज हो गए हों। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी में देरी न करें और गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें।