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कपास के बाद अब गाजर के रेट ने किसानों को किया मायूस

Sat, 19 Dec 2015 12:12 AM IST
Rate of carrot fell down
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कपास की फसल सफेद मक्खी से बर्बाद होने के बाद गाजर की फसल लगाने वाले किसान मायूस हैं। हजारों एकड़ में लगी गाजर की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा बन गई है।
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किसान को गाजर के रेट दो से तीन रुपये किलोग्राम के हिसाब से मिल रहे हैं। पिछले साल की तुलना में यह रेट आधे से भी कम है।

हिसार से बरवाला रोड पर स्थित करीब दस से अधिक गांवों में हजारों एकड़ में गाजर की फसल लगाई जाती है, जिससे किसानों को काफी फायदा होता था। लेकिन इस बार किसानों के लिए गाजर घाटे का सौदा बन रही है। मंडी में गाजर के दाम बेहद कम होने से किसान परेशान हैं।

बहबलपुर, खेड़ी बर्की, राजली, बाडयो पट्टी, जुगलान, सरसौद, रायपुर, शिकारपुर, मिर्जापुर, भोजराज, मीरकां सहित अन्य गांवों में करीब पांच हजार एकड़ में गाजर की फसल लगाई जा गई थी। गाजर की बेल्ट के तौर पर पहचान बना चुके इन गांवों में दिल्ली से लेकर पंजाब तक के व्यापारी आते हैं।
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अब पंजाब के अबोहर, बठिंडा, फाजिल्का जिलों में भी किसानों ने बड़ी संख्या में गाजर लगानी शुरू कर दी है। इस कारण पंजाब से व्यापारी का आना कम हो गया है। गाजर बेल्ट के किसान लोकल मंडी में ही अपनी फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कपास की फसल खराब होने पर इस बार किसानों को गाजर से फसल से काफी उम्मीदें थीं।

लोकल सब्जियों के दाम काफी कम चल रहे हैं। मार्केट की डिमांड तथा सप्लाई के हिसाब से रेट ऊपर नीचे होते रहते हैं। इस समय गाजर के दाम तीन से पांच रुपये के बीच हैं। यह खुदरा के रेट हैं। पिछली बार के हिसाब से थोड़ा कम रेट हैं।

- मोहनलाल सैनी, प्रधान, सब्जी मंडी, हिसार
मैंने पांच एकड़ में गाजर की फसल लगाई है। इस बार दाम इतने कम आ गए हैं कि बड़ी मुसीबत आ गई। पिछले साल के हिसाब से रेट माटी हो गए हैं। दो से तीन रुपये में मजदूरी और गाड़ी का किराया भाड़ा ही पूरा हो रहा है। अब आने वाले दिनों में रेट बढ़ने की उम्मीद नहीं है। किसान को पहले कपास ने मारा अब गाजर ने मार दिया।
- सुरेश कुमार, किसान, गांव खेडी बर्की, हिसार

एक एकड़ गाजर तैयार करने में करीब 35 हजार रुपये खर्च आता है। इसमें तकरीबन 15 हजार रुपये मजदूरी का खर्च होता है। इसके अलावा पानी, खाद, बीज का खर्च होता है। मैंने दस एकड़ में गाजर लगाई है। इस बार दो से तीन रुपये किलो के रेट मिल रहे हैं। पिछली बार दस रुपये से कम भाव नहीं था। इस बार लागत निकलना ही मुश्किल हो रहा है।
- भजनलाल, किसान, गांव बहबलपुर, हिसार

मंडी में थोक में गाजर के दाम तीन से पांच रुपये चल रहे हैं। लोकल सब्जियों मूली, गोभी के भी लगभग यही दाम मिल रहे हैं। पिछले साल के हिसाब से रेट कम हैं। हम किसानों के फार्मर इंटरेस्ट ग्रुप बनाने पर विमर्श कर रहे हैं। इसके लिए बहबलपुर के आसपास गाजर बेल्ट के किसानों से बातचीत की गई है। जिसके बाद यहां ग्रेडिंग, पैकिंग तथा स्टोरेज की सुविधा देंगे। - बलजीत भ्याण, जिला उद्यान अधिकारी, हिसार
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