Rakhigarhi will get world class facilities: Prahlad Singh
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राखीगढ़ी को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने की जिम्मेवारी केंद्र सरकार की है, जो हम मुहैया करवाएंगे। क्योंकि राखीगढ़ी में हमारे पास जो है, विश्व में वह किसी के पास नहीं है। यह बात केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने रविवार को गांव राखीगढ़ी सभ्यता की विभिन्न साइटों का दौरा करते हुए कही।
उन्होंने ग्रामीणों को भी इसमें सहयोग की अपील की। इस दौरान ग्रामीणों ने उनसे हिसार से सीधा सड़क मार्ग से जोड़ने की बात कही। जिस पर उन्होंने जल्द ही उनकी मांग को मंजूर करवाने की बात कही। इस दौरान आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने थ्री डी प्रेजेंटेशन के माध्यम से राखीगढ़ी की साइट व म्यूजियम पर चल रहे कार्यों का विवरण सबके सामने रखा। उन्होंने साइट नंबर एक, दो व चार का दौरा भी किया। उन्होंने एक नंबर साइट पर सेल्फी भी ली।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि राखीगढ़ी का जो इतिहास है, वह दूसरी बार दुनिया के इतिहास को बदल रहा है। हड़प्पाकालीन सभ्यता पहले से ही यहां मौजूद थी। केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राखीगढ़ी को स्थान दिलाया है। खुदाई तो यहां पर पहले से ही चली हुई थी, लेकिन खुदाई से मिली चीजों को सुरक्षित रखना वास्तव में दुनिया भर के लिए स्मारक है। जमीन भारत की है, लेकिन अगर सभ्यता की दृष्टि से कोई इसकी जानकारी लेने चाहता है तो उसे राखीगढ़ी आना होगा। हम इन सभी साइटों को भी सुरक्षित रखना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। खुदाई चाहे अभी तक पुरातत्व विभाग द्वारा ही कि गई हो या फिर डेकन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर शिंदे की टीम ने की हो। हम इन दोनों का ही सम्मान करते हैं और इन्हें बधाई देते हैं कि उन्होंने देश व दुनियां के लिए बहुत बड़ा काम किया है। आगे का सारा काम केंद्रीय पुरातत्व विभाग को देखना है।
बारहवीं पास विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कोर्स शुरू किए गए
राज्यमंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि साइट को म्यूजियम हब बनाने का हमारा मकसद है। राखीगढ़ी में विकास की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारी पर्यटक सहयोगी की एक स्कीम चल रही है, जिसके लिए सरकार निशुल्क ट्रेनिंग देगी। बारहवीं पास विद्यार्थियों के लिए भी छह महीने के ऑनलाइन कोर्स शुरू किए गए हैं या फिर आप पर्यटन सहयोगी बन सकते हैं। हम भाषाओं की जानकारी के लिए पहले नालंदा भेजते थे, अब झज्जर के एक गुरुकुल में 15 भाषाओं को सिखा सकते हैं। अपने बच्चों को गाइड बना सकते हैं, जिसका खर्च भारत सरकार उठाएगी।