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पीजी में पैसे बचाने के चक्कर में एक ही कमरे में रहते हैं तीन से चार बच्चे

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कुछ पैसे बचाने के चक्कर में अवैध रूप से बनी पीजी में कॉलेजों से लेकर कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। अगर पीजी में कोई विद्यार्थी अकेले रहने के लिए कमरा मांगे तो उससे सात से आठ हजार रुपये वसूले जाते हैं, जबकि दो से तीन विद्यार्थी अगर साथ रहे तो उनसे 4500 रुपये लिए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि आए दिन शहर में नए-नए पीजी खुल रहे हैं, जबकि निगम प्रशासन इनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
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गौरतलब है कि शहर में 300 से ज्यादा पीजी बने हुए हैं। इनमें से एक के पास भी नगर निगम कार्यालय से रजिस्ट्रेशन नहीं है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने नियम बनाए हैं, लेकिन एक भी पीजी इन नियमों पर खरा नहीं उतरता है।
खाली कोठियों को किराये पर लेकर बना दिए जाते हैं पीजी
जैसे ही शहर में कोई सात से आठ कमरों की कोठी खाली दिखती है, तो उसमें व्यवसाय चलाने के लिए सबसे पहला विकल्प पीजी का ही अपनाया जाता है। अर्बन एस्टेट, सेक्टर 13, मॉडल टाउन से लेकर रामपुरा मोहल्ला, डोगरान मोहल्ले में भी कई ऐसी कोठियां हैं, जिनके मालिक शहर से बाहर रहते हैं। इन कोठियों को हर महीने 40 से 50 हजार रुपये किराये पर चढ़ाकर कोठी मालिक पीजी संचालकों को सौंप देते हैं।
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कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन देने के नाम पर ही बढ़ जाते हैं रुपये
एक पीजी में सुविधाओं के नाम पर रेट बढ़ते चले जाते हैं। सिर्फ रहने के लिए कमरा चाहिए तो तीन लोगों के एक साथ रहने पर 2500 रुपये में मिलेगा। तीनों टाइम का खाना चाहिए तो यही रेट 4500 से पांच हजार हो जाएंगे। इसके बाद कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन, प्रेस की सुविधा चाहिए तो रेट और बढ़ जाएंगे।
लड़कों के पीजी में अक्सर होते हैं बवाल
कई पीजी ऐसे भी हैं, जिनमें आवारा किस्म के युवक भी रहते हैं। इन युवाओं द्वारा बवाल मचाने और आपस में ही लड़ने की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। बैंक कॉलोनी, मॉडल टाउन, जवाहर नगर और ऋषि नगर एरिया के कई पीजी में असामाजिक घटनाएं हो चुकी हैं। अक्सर शहरवासी रिहायशी एरिया में चल रही पीजी को बंद करवाने की मांग निगम प्रशासन से कर चुके हैं।
पीजी संचालकों को लेकर निगम प्रशासन ने नियम व मापदंड बनाए हुए हैं। जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस के जवाब मिलने के बाद आगामी कार्रवाई करेंगे।
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- सुमित ढांडा, बिल्डिंग इंस्पेक्टर, नगर निगम
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