विशेषज्ञों के अनुसार एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए जिन चीजों की जरूरत होती हैं, उनमें रिसर्च सेंटर जरूरी होता है, ताकि शोधकर्ता यहां आकर अपनी शोध कर सकें। साइट हवाई व सड़क मार्ग से भी जुड़ी होनी चाहिए। चूंकि हिसार में पहले से ही एयरपोर्ट बन रहा है। अब इसे सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा। अभी हिसार से हांसी तक फोरलेन हैं, लेकिन आगे टू लेन रोड ही है। संभावना ही आगे के रोड को फोरलेन बनाया जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके अलावा साइट पर म्यूजियम, हॉस्टल, गेस्ट हाउस व कैफेटेरिया की जरूरत होती है, जो कि निर्माणाधीन हैं।
विदेशी पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
अभी तक इस साइट पर सिर्फ रिसर्च स्कॉलर ही आते हैं। मगर वर्ल्ड हेरिटेज के रूप में विकसित होने के बाद यहां विदेशी पर्यटकों के आने की भी संभावना बढ़ेगी। देसी व विदेशी पर्यटकों के यहां आने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यही नहीं अगर यहां उपलब्ध होने वाली सुविधाएं यूनेस्को के मानकों पर खरा उतरती हैं तो शायद यह प्रदेश की पहली वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी बन सकती है।
1998 में पहली बार हुई थी खुदाई
इतिहासकार डॉ. सूरजभान ने 1963 में राखीगढ़ी साइट को लेकर पीएचडी की थी। वर्ष 1998 में यहां पहली बार खुदाई हुई थी, जिसमें पुराने अवशेष मिले थे। वर्ष 2004 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री जगमोहन ने 16 करोड़ रुपये का देने का एलान करते हुए यहां म्यूजियम बनाने की बात कही थी, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ सकी थी।
इसके बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दो करोड़ का फंड जारी करते हुए यहां म्यूजियम का शिलान्यास करने की घोषणा की थी। मगर स्वागत की तैयारियों में करंट लगने से एक व्यक्ति की जान चली गई थी और यह प्रोजेक्ट दो साल तक लटकता रहा। आखिरकार वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां म्यूजियम का शिलान्यास किया।
डेक्कन डीम्ड यूनिवर्सिटी पुणे के पुरातत्वविद् प्रोफेसर वसंत शिंदे के नेतृत्व में 2015 में राखीगढ़ी के आसपास 900 वर्ग मीटर में खुदाई की गई थी, जिसमें कई कंकाल और सभ्यता के अवशेष मिले थे। उस दौरान शिंदे ने दावा किया अभी तक यह माना जा रहा था कि हड़प्पा के प्रमुख नगर मोहनजोदड़ो को पश्चिमी मेसोपोटामिया (ईराक, कुवैत, सीरिया-तुर्की) के लोगों ने आकर बसाया था। जो भी शोध के दौरान गलत साबित हुई है।
उनके मुताबिक राखीगढ़ी में जो अवशेष मिले हैं, उनसे यह बात सामने आती है कि राखीगढ़ी सभ्यता के लोगों ने हड़प्पा, मेसोपोटामिया, ईजिप्ट आदि सभ्यताओं के निर्माण में योगदान दिया। यह बात को साबित करता है कि राखीगढ़ी की सभ्यता हड़प्पा सभ्यता से भी पुरानी है। उनके मुताबिक राखीगढ़ी एक छोटा सा गांव था, जो बाद में सुनियोजित नगर के रूप में उभरकर सामने आया।
बजट 2020 में नारनौंद स्थित राखीगढ़ी को प्रतिष्ठित दर्जा और अनुदान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने राखी गढ़ी को दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग पहचान होना मेरे लिए एक सपने के साकार होना है। - कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व वित्त मंत्री हरियाणा
यहां आइकोनिक साइट का मतलब है वर्ल्ड हेरिटेज लेवल की साइट बनाना। एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए जो मानक होने चाहिए, उनमें से कुछ तो यहां पहले से ही हैं, जबकि कुछ मानकों को पूरा करना पड़ेगा। अगर राखीगढ़ी की साइट एक आइकोनिक साइट के रूप में विकसित होती है तो वह दिन भी दूर नहीं है, जब यह एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी बन जाएगी। शुभम कुमार, टेक्निकल असिस्टेंट, डिपार्टमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी ऐंड म्यूजियम, हरियाणा