जीजीयू में वीरवार को विश्वविद्यालय का चौथा दीक्षांत समारोह मनाया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के 950 विद्यार्थियों को डिग्री वितरित की गई। वहीं अपनी कक्षाओं में टॉप करने वाले 135 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिए गए। समारोह के दौरान पूरा सभागार श्वेतमय नजर आ रहा था। इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं प्रदेश के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे
। उन्होंने रेल मंत्री सुरेश प्रभु और वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की निदेशक सरोज बाला को पीएचडी की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया। वहीं श्रीश्री रविशंकर पूर्व सूचना के मुताबिक समारोह में नहीं आए। उन्हें भी मानद उपाधि दी जानी थी। वहीं शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा भी अस्पताल में भर्ती होने के कारण नहीं आ सके
शांति के प्रतीक सफेद रंग में रंगा सभागार
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय का सभागार शांति के प्रतीक सफेद रंग में रंगा हुआ था। सभागार में बैठा प्रत्येक व्यक्ति अपनी पारंपरिक वेशभूषा में था। उनकी वेशभूषा से ऐसा लग रहा था, मानो भारत की प्राचीन संस्कृति पर कुंडली मारे बैठी पश्चिमी सभ्यता को जवाब दिया जा रहा हो। महिलाएं लाल बार्डर की सफेद साड़ी और सूट पहने हुए थीं। जबकि पुरुष साधारण सफेद पेंट शर्ट या पायजामे कुर्ते में संस्कारों की शिक्षा देते नजर आ रहे थे। डिग्रियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से लेकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स, अधिकारी और कर्मचारी और मंच पर आए अतिथि, सभी सफेद रंग की ड्रेस में नजर आए।
27 मिनट रुके प्रभु
दीक्षांत समारोह में रेलमंत्री सुरेश प्रभु को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया। वे केवल 27 मिनट तक ही विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में रुके। वे अन्य अतिथियों के साथ 11 बजकर 47 मिनट पर ऑडिटोरियम में पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने कुछ देर ईयरफोन लगा फोन पर बात की और इसके बाद मानद उपाधि लेकर सवा बारह बजे ऑडिटोरियम से निकल लिए।
राज्यपाल ने 105 विद्यार्थियों को दी पीएचडी की डिग्री
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कुुलाधिपति कप्तान सिंह सोलंकी ने पीएचडी के 105 विद्यार्थियों को डिग्री देकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने दीक्षांत भाषण दिया और कार्यक्रम से चले गए। इसके बाद बाकी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर टंकेश्वर कुमार ने डिग्रियां वितरित की। उन्होंने 135 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 507 विद्यार्थियों को पीजी व 338 को यूजी की उपाधियां प्रदान की।
कुलपति ने बताई 21 वर्षों की यात्रा
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने विश्वविद्यालय की 21 वर्षों की यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को नैक द्वारा लगातार तीन बार ए ग्रेड मिला है। विश्वविद्यालय में 49 नियमित तथा 16 दूरवर्ती पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश प्रदेश में तकनीकी विश्वविद्यालय के रूप में प्रथम स्थान मिलना यहां के शिक्षक तथा गैर शिक्षक कर्मचारियों के समर्पण भाव का परिणाम है। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की योजना के तहत मिले 10.25 करोड़ रुपये की सहायता राशि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश भर के विवि में जीजेयू की 24वीं रैंक है, जो प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को स्मृति चिह्न व शॉल भेंट कर सम्मानित किया। एकेडमिक प्रोसेशन की अगवाई विवि के कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार पुंडीर ने की। वानाराई एनजीओ एवं चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्र धारिया को मधु भसीन अवॉर्ड दिया गया। मंच संचालन प्रो ज्योत्सना ने किया।
ये रहे मौजूद
दीक्षांत समरोह में मुख्य संसदीय सचिव डॉ. कमल गुप्ता, गुजवि रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पुंडीर, गुजवि परीक्षा प्रो. कुलदीप बंसल, पूर्व कुलपति आरपी वाजपेयी, एमडीयू के कुलपति प्रो. बी.के. पूनिया, सीडीएलयू के कुलपति, हिसार के आयुक्त राजीव रंजन, लुवास के कुलपति मेजर जनरल श्रीकांत शर्मा, एचएयू के कुलपति प्रो. केपी. सिंह, पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति डॉ. ओ.पी. कालड़ा, डॉ. आरपी. बाजपेयी व डॉ. आरआर फूलिया, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारी एवं डिग्रीधारक उपस्थित थे।