नारनौंद। भारतीय किसान यूनियन एकता (सिद्धपुर) की किसान जागृति यात्रा रविवार शाम नारनौंद स्थित जाट धर्मशाला पहुंची। यात्रा की अगुवाई कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने केंद्र सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर सवाल उठाए।
डल्लेवाल ने आरोप लगाया कि कर्ज और फसलों के वाजिब दाम न मिलने के कारण देश में अब तक लगभग 7 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। किसानों की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दरों पर खरीदी जा रही है और 2000 से 2025 तक किसानों को 111 लाख करोड़ रुपये कम मिलेंगे। करीब 25 लाख करोड़ रुपये के कर्ज ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है और किसानों के कर्ज मुक्त होने तक देश तरक्की नहीं कर सकता।
अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर डल्लेवाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे भारत की कृषि और डेयरी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि अमेरिका से अनाज और डेयरी उत्पादों का आयात बढ़ेगा और भारतीय किसानों की फसलें बाजार में नहीं बिक पाएंगी।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि नारनौंद के किसानों ने पूर्व में क्रांतिकारी आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने यात्रा के राजनीतिक उद्देश्य से इन्कार करते हुए कहा कि यह अभियान एमएसपी गारंटी कानून की मांग और किसानों के हकों की लड़ाई को मजबूत करने के लिए है।
जिला प्रधान दशरथ मलिक ने 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित किसान रैली में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की ताकि सरकार को यह संदेश भेजा जा सके कि किसानों का भविष्य विदेशों में बैठकर तय नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर अरुण पटेल मध्य प्रदेश, सुरेश पाटिल कर्नाटक, इंद्रजीत राजस्थान, बलवान लोहान, हर्षदीप गिल मोठ, मा. सतबीर पेटवाड़, शीलू लोहान, बलवान बैरागी आदि मौजूद रहे।