हांसी। शातिरों ने विदेश में बैठ अधिवक्ता को डिजिटल अरेस्ट कर 1.33 करोड़ रुपये ठगे थे। वहीं मामले में शातिरों ने ठगी राशि से डॉलर खरीद लिए हैं। ऐसे में अब शातिरों को पकड़ने में पुलिस की टीमों को समय लग रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में मुख्य आरोपियों को पकड़ा जाएगा।
शातिरों ने शहर के अधिवक्ता राजकुमार वत्स को 19 नवंबर को पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर व उन्हें कार्रवाई का डर दिखाकर 1.33 करोड़ रुपये ठगे थे। उनके पास पहली व्हाट्सएप कॉल 19 नवंबर को आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि वह डिजिटल अरेस्ट है और कार्रवाई से बचना है तो उनके खातों में रुपये डाल दे। वह शातिरों के बताए बैंक खाते में रुपये डालते रहे। बाद में उन्हें पता लगा कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। पुलिस ने 27 नवंबर को शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया था।
आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने एक विशेष टीम का भी गठन किया हुआ है। जो केवल इसी मामले की जांच कर रही है। अभी तक की पुलिस जांच में पता चला है कि शातिरों ने ठगी के रुपये से डॉलर खरीद लिए हैं। ऐसे में अब पुलिस को आरोपियों की पहचान करने में और समय लगेगा। शातिरों ने अधिवक्ता को अधिकतर व्हाट्सएप कॉल ही की थी। ठगी में उपयोग किए आईपी एड्रेस जो पुलिस को पता लगे हैं, उसमें से अधिकांश विदेश के हैं। ऐसे में यही पता चला है कि शातिरों ने विदेश में बैठ कर ठगी को अंजाम दिया है।
मामले में अब तक साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी वे बैंक खाता धारक हैं जिनके खाते में ही ठगी के रुपये डाले गए। हालांकि ठगी के रुपये कई अन्य बैंक खातों में भी ट्रांसफर किए गए थे। इन खाताधारकों को भी पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। पकड़े गए आरोपियों का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि खाते में आया हुआ पैसा ठगी का है। उन्हें यह बताया गया था कि खाते में कुछ जरूरत का पैसा आना है। खाते में पैसे डलवाने पर उन्हें कुल डलवाए गए पैसे का एक प्रतिशत कमीशन मिलना था। जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो उन्हें पता लगा कि पैसा ठगी का है।
मामले की जांच की जा रही है। इसके लिए विशेष टीम का भी गठन कर रखा है। जो मामले की छानबीन कर रही है। मामले में आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करेंगे।- रविंद्र सांगवान, डीएसपी, हांसी।