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जांच कमेटी ने पांचों कर्मचारियों को नोटिस देकर फिर तलब किया जवाब

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हिसार। पांच हजार प्रॉपर्टी की बैलेंस शीट जीरो के मामले में गठित जांच कमेटी ने मामले में संलिप्त पांचों कर्मचारियों को नोटिस देकर फिर से जवाब मांगा है। कमेटी का कहना है कि कर्मचारियों ने कुछ सवालों के गोलमोल जवाब दिए हैं। इस कारण से उन्हें नोटिस थमाकर फिर से इन सवालों के जवाब देने को कहा गया है। जवाब देने के लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है। जवाब मिलने के बाद कमेटी इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी।
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बता दें कि इससे पहले 9 जुलाई को जांच कमेटी की बैठक हुई थी। इस बैठक में कमेटी ने मामले में शामिल कर्मचारियों के लिखित में बयान लिए थे। साथ ही इस मामले से जुड़े दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लिया था। इनके आधार ही कमेटी को फैसला लेना है।
इन बिंदुओं पर रिकॉर्ड सहित मांगा था जवाब
- किस अधिकारी के आदेश पर बकाया जीरो किया गया।
- किस तारीख को बकाया जीरो किया गया और उसके ठीक करने के लिए कब पत्र लिखा गया व उसकी कब रिकवरी हुई।
- बकाया जीरो करने पर हुई वित्तीय हानि के लिए कौन जिम्मेदार है।
- कार्यकारी हरदीप सिंह के समय जो जांच हुई, उसकी न तो जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई और न ही उस रिपोर्ट में हमारी सहमति दी थी, फिर भी हमारी सहमति दिखाई गई।
- किन कर्मचारियों को जी8 जारी की गई थी और क्या उन कर्मचारियों द्वारा उस जी8 की राशि जमा करवाई गई।
- पूर्ण वर्क ऑर्डर प्रस्तुत किए जाए।
- क्या बकाया जीरो करने के बाद किए गए कार्य को वेरिफाई किया गया।
- जिन प्रॉपर्टी का बकाया जारी किया गया, क्या उन्हें ठीक करने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स की अदायगी की जा चुकी है अथवा नहीं।
- कितनी प्रॉपर्टी का बकाया जीरो किया गया, उसकी लिस्ट दी जाए, जिसमें प्रॉपर्टी आईडी व नाम दर्शाया जाए।
यह है मामला
15 सितंबर 2016 को निगम की ओर से एक निजी कंपनी को पत्र जारी कर 5 हजार बैलेंस सीट शून्य करवा दी थी, जिनका करोड़ों का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया था। मामले का खुलासा पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला के कार्यकाल में हुआ था। पार्षदों की मांग पर जांच कमेटी बना दी गई, लेकिन अधिकारियों ने चालाकी से खुद को पाक साफ दिखाई दिया। अब पार्षदों ने दोबारा से आवाज उठाई तो सीनियर डिप्टी मेयर के नेतृत्व वाली कमेटी ने फिर से जांच शुरू की है, जिसमें पार्षद भूप सिंह रोहिल्ला व प्रीतम सैनी को शामिल किया गया। जांच के दौरान पांच हजार में करीब 4400 की जांच के दौरान रिकवरी हुई थी। जिसमें 14 करोड़ से अधिक का राजस्व आया।
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इन कर्मचारियों के खिलाफ चल रही है जांच
तत्कालीन सचिव राजेश महता, सेवानिवृत्त अधीक्षक कैलाश चंद्र, सहायक सत्यवान मलिक, क्लर्क नरेश व लेखाकार अंशु।
जवाब मिलने के बाद आगे यह रही प्रक्रिया
कर्मचारियों से जवाब मिलने के बाद कमेटी द्वारा बैठक कर जांच का पूरा निष्कर्ष निकाला जाएगा। इस निष्कर्ष के आधार पर कमेटी कार्रवाई के लिए निगम से सिफारिश करेगी। इसके बाद निगमायुक्त द्वारा इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। अगर इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई की जाती है तो निगम को इसके लिए मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। साथ ही हाउस की बैठक में भी इस मामले को रखा जाएगा।
वर्जन
कर्मचारियों ने कुछ सवालों के जवाब गोलमोल दिए हैं। इस कारण से इन्हें नोटिस देकर फिर से जवाब मांगा गया है। इसके लिए इन्हें एक सप्ताह का समय दिया गया है।
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- भूप सिंह रोहिला, पार्षद एवं जांच कमेटी सदस्य
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