करवाचौथ को लेकर बाजार में खरीदारी करतीं महिलाएं।
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हिसार। सुहाग का प्रतीक करवा चौथ का त्योहार बुधवार को मनाया जाएगा। इस बार करवा चौथ का व्रत मृगशिरा नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाया जाएगा, जोकि काफी शुभ और फलदायी बताया जा रहा है। व्रत को लेकर बाजार में सुहागिनों ने खरीदारी शुरू कर दी है। देर शाम तक बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी रही। सोमवार को भी हजारों की संख्या में महिलाएं राजगुरु मार्केट खरीदारी के लिए पहुंचीं और सुहाग के लिए चूड़ी, मेहंदी, बिंदी आदि सामान की खरीदारी की।
ऋषि नगर स्थित विश्वकर्मा मंदिर के पुजारी एवं राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था के जिलाध्यक्ष आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि चतुर्थी तिथि की शुरुआत 4 नवंबर को अलसुबह 3:25 बजे होगी और चतुर्थी तिथि का समापन 5 नवंबर को सुबह 5:15 बजे होगा। करवाचौथ का व्रत सरगी से शुरू होता है और चंद्र पूजा पर समाप्त होता है।
सूर्योदय से पहले करने वाले भोजन को कहते हैं सरगी
करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किए जाने वाले भोजन को सरगी कहते हैं। सुहागिनें अपनी सास द्वारा या किसी अन्य बुजुर्ग महिला द्वारा दी गई सरगी प्रसाद रूप ग्रहण करती हैं और करवाचौथ का व्रत शुरू करती हैं।
2 घंटे 58 मिनट रहेगी चंद्रमा पूजा की कुल अवधि
करवा चौथ पूजन का मुहूर्त 4 नवंबर शाम 4:47 बजे शुरू होकर शाम 7:05 बजे तक रहेगा। चंद्रमा पूजा की कुल अवधि 2 घंटे 58 मिनट रहेगी। चंद्रमा निकलने का समय रात 8:28 बजे रहेगा। इस दिन सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी आयु की कामना कर व्रत खोलती हैं।
भगवान गणेश की पूजा करने के बाद सुनें कहानी
राममेहर शास्त्री ने बताया कि इस दिन सभी सुहागिनें सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर कलश स्थापन करें। रोली या पिसे हुए चावलों के गोल से माता करवा का चित्र बना लें। मां गौरी गणेश और भगवान शिव पार्वती की मूर्ति चौकी पर स्थापित करें। फिर विधिवत पूजा करके सुहाग का समान मां को अर्पित करें। उसके बाद भगवान गणेश की पूजा करने के बाद करवा माता की कहानी सुनें और सुनाएं। अंत में अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए अपनी सास से आशीर्वाद लें और उन्हें करवा भेंट करें। फिर चंद्रमा की पूजा कर अर्घ्य दें और अपने पति से आशीर्वाद लें।