आवेदन करने वाली कंपनी का पिछले तीन वर्षों (2022-23 से 2024-25) का औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 15 करोड़ रुपये होना अनिवार्य है। आवेदक कंपनी के पास एयर ऑपरेटर, एफटीओ, एमआरओ या एयरक्राफ्ट व ड्रोन असेंबली के क्षेत्र में कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए। प्रत्येक हैंगर के लिए 25 लाख रुपये ईएमडी (बयाना राशि) जमा करनी होगी। सफल बिडर को छह महीने के किराये के बराबर परफॉर्मेंस बैंक गारंटी देनी होगी। अलॉटमेंट पाने वाली विदेशी या भारतीय कंपनी को अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के 180 दिनों के भीतर हरियाणा में अपना पंजीकृत कार्यालय खोलना होगा।
लीज पर दिए स्पेस का उपयोग डीजीसीए की मंजूरी के तहत केवल विमानन गतिविधियों के लिए किया जाएगा। छोटे एयरक्राफ्ट, ड्रोन और गायरोकॉप्टर की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जा सकेगी। इसके अलावा एयरक्राफ्ट का एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल), एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस स्टाफ और संबंधित एविएशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का संचालन किया जा सकेगा। हेलिकॉप्टर, एक्टिव एयरक्राफ्ट और ड्रोन की पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
12 सितंबर 2025 को एचएडीसीएल ने हिसार एयरपोर्ट की आय बढ़ाने के लिए हैंगर किराये पर देने की योजना का प्रस्ताव तैयार किया था। एयरपोर्ट की आय बढ़ाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपा गया था। इसमें दुबई जाने वाली फ्लाइट का कार्गो लेने की योजना भी शामिल है। इसके लिए जल्द ही कस्टम विभाग में आवेदन किया जाएगा। ऐसा होने पर हिसार सीधे दुबई से कारोबार के तौर पर जुड़ जाएगा।
हिसार एयरपोर्ट को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में एयरपोर्ट के हैंगर लीज पर देने का प्रस्ताव है, ताकि उनका समुचित उपयोग हो सके और एयरपोर्ट को बेहतर राजस्व प्राप्त हो। -रणबीर गंगवा, पीडब्ल्यूडी मंत्री, हरियाणा।