एक बार फिर वातावरण में प्रदूषण की स्थिति खतरनाक हो गई है, जिससे लोगों की सांसें फूलने और आंखें जलनी शुरू हो गईं है। मंगलवार को शहर का वायु गुुणवत्ता सूचकांक मंगलवार रात आठ बजे 477 पर पहुंच गया। वातावरण में धूल व धुएं की चादर छा गई है। धुंध के आने से स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। धुंध व धुएं के मिलने से दृश्यता भी कम हो गई है।
अस्पतालों में दोबारा से सांस के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के ऊपर से एक पश्चिमी विक्षोभ गुजरेगा, जिससे 14 नवंबर की रात या 15 नवंबर को सिर्फ सिरसा जिले में बूंदाबांदी होगी। हालांकि इस दौरान जिले में तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे इस धुएं की राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बता दें कि सोमवार को ही शहर में प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब की श्रेणी में पहुंच गई थी। रात 11 बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 359 पर पहुंच गया था। मंगलवार सुबह आठ बजे यह 400 के आंकड़े को पार गया और शाम तक इसमें बढ़ोतरी जारी रही।
बादल और धुंध छाने की वजह
14 व 15 नवंबर को एक पश्चिमी विक्षोभ राजस्थान के ऊपर से गुजर रहा है। इसी वजह से हल्के बादल छाए हुए हैं। वहीं मौसम में नमी की मात्रा ज्यादा है और तापमान भी कम है, जिस कारण से यह धुंध छाई हुई है।
इन वजह से फिर दूषित हुई हवा
पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार किसान निरंतर पराली जला रहे हैं। बरवाला स्थित थर्मल प्लांट में रोजाना लाखों किलो कोयला जलाया जाता है, जिससे काफी मात्रा में धुआं पैदा होता है। थर्मल प्लांट की सभी यूनिट निरंतर चल रही हैं। शहर में सभी फैक्ट्रियां चल रही हैं। वाहनों की संख्या में भी कोई कमी नहीं आई है। इसके अलावा नगर निगम के ढंढूर स्थित कचरा प्लांट में कचरा जलता रहता है। इसके अलावा वातावरण में तापमान में भी कमी आई है। इन सभी कारणों के कारण हवा फिर से दूषित हुई है।
इन कारणों से बनती है धुएं की चादर
वैसे तो वातावरण में हर समय धूल व धुुएं के कण मौजूद रहते हैं। मगर कभी-कभी व कुछ गतिविधियों से वातावरण में इनकी मात्रा बढ़ जाती है। अगर वातावरण में नमी की मात्रा ज्यादा है और तापमान भी कम है तो उस स्थिति में धूल व धुएं के कण नमी के साथ मिलकर बड़े आकार के व भारी हो जाते हैं और वातावरण से बाहर नहीं जा पाते। फिर यह धुएं की चादर के रूप में नजर आते हैं।