आसाराम प्रकरण के मुख्य गवाह महेंद्र चावला के घर ताला तोड़कर चोरी करने के मामले में 1995 में मरे हुए व्यक्ति को गवाह बनाकर एफआईआर रद्द करने का खुलासा हुआ है। इस बारे में महेंद्र चावला ने एसपी को डीएसपी सतीश वत्स, एसएचओ सूरजभान और दो अन्य के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिस ने सही तथ्यों के आधार पर जांच नहीं की। पेश किए गए तथ्यों को जांच में शामिल नहीं किया, जबकि अपने स्तर से औपचारिकता पूरी करके केस को रद्द कर दिया। इस चोरी का आरोप मुख्य गवाह महेंद्र चावला की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी पर है।
महेंद्र चावला ने एसपी पानीपत के सामने तथ्य पेश करते हुए कहा है कि 19 अप्रैल 2019 को वह सुरक्षाकर्मी हवलदार पुनीत के साथ लघु सचिवालय में आए थे, इस दौरान हवलदार पुनीत बिना बताए वहां से गायब हो गया। जब वह शाम सात बजे घर पहुंचे तो घर का ताला टूटा हुआ था और घर से दस्तावेज चोरी हो गए थे। सीसीटीवी फुटेज देखी तो उसमें हवलदार पुनीत घर का दरवाजा कूदकर घर में घुसता नजर आया था। जिसकी शिकायत सनौली थाना पुलिस को शिकायत दी थी। आरोप है कि आईओ एएसआई श्रीभगवान और हवलदार राजेंद्र सिंह ने केस को बंद करने की नियत से पुख्ता प्रमाण को गायब करते हुए 1995 में मरे हुए व्यक्ति सतनारायण को गवाह बना दिया। उसी रिपोर्ट के आधार पर डीएसपी सतीश वत्स ने केस को बंद कर दिया।
चोरी वाले दिन आना था नारायण साईं का फैसला
महेंद्र ने बताया कि 19 अप्रैल को नारायण साईं दुष्कर्म के मामले में फैसला आना था। उसी दिन उनके घर में चोरी की वारदात को अंजाम दिलवाया गया, ताकि वह मानसिक पर रुप से परेशान हो सके और पैसों के लालच में आकर पीछे हट जाए, लेकिन उनका कहना है कि वह इस घटनाओं का निडर होकर सामना कर सकते हैं, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। उन्हें पुलिस पर उनकी सुरक्षा में लापरवाही बरतते हुए बुजुर्ग और शराब के आदी पुलिसकर्मियों को भेजने का आरोप लगाया।
जानिए केस की जांच कैसे हुई
महेंद्र ने बताया कि 19 अप्रैल को चोरी होने के बाद उन्होंने सनौली थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर नहीं पहुंची तो उसने रात 10 बजे थाने में जाकर ही शिकायत दी। जिसमें आईओ एएसआई श्रीभगवान व हवलदार राजेंद्र सिंह ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जिसमें उन्होंने नौ गवाह बनाए, जिसमें एक 1995 में मौत हुआ युवक भी शामिल था, जिसका नाम सतनारायण पुत्र जीत राम था। इसके साथ ही तीन युवकों को गांव का निवासी बताया गया, जो उनके गांव के ही नहीं थे, जिनका नाम प्रवीन पुत्र संभू, शिवचरण पुत्र नंदू, त्रिलोकी पुत्र नंदू है।
इसके अलावा महेंद्र की ओर से दी गई सीसीटीवी फुटेज व टूटा हुआ ताला भी शामिल नहीं किया। यह रिपोर्ट उन्होंने एसएचओ सूरजभान को पेश की, वहीं एसएचओं ने आरोपी सुरक्षाबल हवलदार को लघु सचिवालय में छोड़कर जाने का कारण पेट में पथरी होने का दर्द बताया। यह सब रिपोर्ट उन्होंने डीएसपी मुख्यालय सतिश वत्स को दी, जिन्होंने केस की फाइल 27 मई को बंद कराई और केस को रद्द कर दिया।
सीसीटीवी ढका होने के कारण
सीसीटीवी में सुरक्षाकर्मी हवलदार पुनीत नजर आ रहा है। वह दरवाजे के पास खड़े होकर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को चेक करता है। उसके बाद वह घर के अंदर घुसता है और दूसरे दरवाजे के बाहर लगे कैमरे पर परदा लगा दिया, ताकि पूरी वारदात सीसीटीवी में कैद न हो। हवलदार ने वारदात को अंजाम देने के बाद जाते समय सीसीटीवी से परदा उतारा और फिर दरवाजे के ऊपर से कूदकर भाग गया।
शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकरण की जांच दूसरे डीएसपी को सौंपी है।
- सुमित कुमार, पुलिस अधिक्षक, पानीपत।
तथ्य के आधार पर कार्रवाई की गई थी, जिसके आधार पर फाइल बंद कर केस रद्द किया गया था। वहीं इसमें गवाह की आवश्यकता नहीं होती, आरोप निराधार है।
- सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय, पानीपत।
फाइल देखकर ही बता सकता हूं, इसके अलावा तथ्य के आधार पर ही जांच की गई होगी।
- सूरजभान, केस में उपस्थित इंस्पेक्टर, सनौली