क्राइम सिटी बनती जा रही हांसी में व्यवस्था को सुधारने के लिए पुलिस ने नया फॉरमेट तैयार किया है। पुलिस कर्मियों की मुस्तैदी बढ़ाने के लिए महकमे के आला अधिकारियों ने सरकारी ड्यूटी में आम लोगों की भागीदारी करने का फैसला लिया है। रात के वक्त स्वयंसेवकों को पीसीआर के साथ तैनात किया जाएगा। वे डीएसपी को भी पुलिस कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट देंगे। ऐसा नहीं है कि पुलिस सिर्फ नागरिकों का ही सहयोग लेगी बल्कि उन्हें भी सहयोग के बदले इनाम देने का निर्णय लिया गया है।
पुलिस उपाधीक्षक सिद्धार्थ ढांडा ने खास बातचीत में कहा कि पुलिस की मदद करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। उन्हें न सिर्फ शाबासी मिलेगी बल्कि पुलिस मुख्यालय द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर उनका हौसला भी बढ़ाया जाएगा। इसके दो फायदे होंगे। एक तो यह कि जहां नागरिकों को पुलिस की कार्यप्रणाली का पता लग सकेगा वहीं ढीले पुलिस कर्मियों को मजबूरन अपने काम करने के अंदाज को चुस्त दुरुस्त करना पड़ेगा।
कई समाजसेवी संगठन आए आगे
डीएसपी ने शहर के कई स्वयंसेवी संगठनों से बात कर उन्हें पुलिस की मदद करने के लिए तैयार किया है। ऐसे स्वयंसेवकों को रात के वक्त पीसीआर पर पुलिस के साथ गश्त पर भेजा जाएगा। डीएसपी ढांडा का कहना है कि शहर के नागरिक जहां एक तरफ क्राइम कंट्रोल में अपने महत्वपूर्ण विजन का इस्तेमाल कर सकेंगे वहीं वे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी अपनी पैनी नजर रख सकेंगे। इन मददगारों को अलग-अलग क्षेत्रों में बदल बदलकर पुलिस के साथ ही ड्यूटी पर लगाया जाएगा। इन्हें बाकायदा पुलिस पहचान पत्र भी जारी करेगी।
इतना ही नहीं पुलिस के इन मददगारों से आला अफसर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी को लेकर जानकारी भी हासिल करेंगे। उनसे पूछा जाएगा कि रात को गश्त के दौरान पुलिस टीम का रवैया और कामकाज का तरीका ठीक था या नहीं। एक तरह से पुलिस के ये मददगार आला अधिकारियों को उनकी टीम की खास रिपोर्ट भी पेश करेंगे। युवा पंजाबी संगठन व कई अन्य एनजीओ ने पुलिस को इस काम के लिए मदद करने की पेशकश की है। इसके अतिरिक्त डीएसपी का कहना है कि कोई भी नागरिक पुलिस की मदद करने के लिए उनसे संपर्क कर सकता है।
उठ रहे थे पुलिस कर्मचारियों पर सवाल
दरअसल पिछले तीन महीनों से शहर में चोरियों और छीना झपटी की वारदातों में इजाफा हुआ है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठ रहे थे। चूंकि थानों पुलिस की नफरी पहले से ही कम है और जो मुलाजिम मौजूद हैं उनके कामकाज को लेकर भी प्रश्न लग रहे थे। ऐसे में पुलिस महकमे के आला अधिकारियों ने एक तीर से कई निशाने साधते हुए मददगार योजना चलाने का प्लान बनाया है।
यह होगा फायदा
इस अभियान से एक तो पुलिस के पास मैन पॉवर बढ़ेगी और साथ ही पुलिस पर लगे रहे आरोपों में गिरावट आएगी। पुलिस के मददगार नागरिक खुद पुलिस की कार्यप्रणाली देख सकेंगे। कमी पाई गई तो सुधार होगा और अगर कामकाज का तरीका ठीक मिला तो कम से कम पुलिस को आरोप नहीं झेलने पड़ेंगे।