हिसार। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में अब किसी तरह का अंतर नहीं चलेगा। योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों की संख्या, दैनिक हाजिरी और मिड-डे मील के लाभार्थियों से जुड़े आंकड़ों का मिलान करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या से संबंधित चारों रिकॉर्ड में समान आंकड़े दर्ज करने होंगे। साथ ही लाभार्थी बच्चों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर उसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। मिड-डे मील के लिए भोजन तैयार करने और वितरित करने की व्यवस्था विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर होती है।
ऐसे में हाजिरी और योजना से जुड़े आंकड़ों में अंतर मिलने पर संबंधित स्कूल स्तर पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने के साथ रिकॉर्ड में किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश खत्म करना है।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की संख्या का रिकॉर्ड एमआईएस पोर्टल, स्टूडेंट डाटाबेस पोर्टल, यूडाइस प्लस और मिड-डे मील से संबंधित रिकॉर्ड में एक समान रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विभागीय स्तर पर अलग-अलग रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकेगा। यदि किसी स्कूल में एक रिकॉर्ड में विद्यार्थियों की संख्या अधिक और दूसरे में कम पाई जाती है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
लाभार्थी बच्चों का रिकॉर्ड होगा तैयार : मिड-डे मील योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों को बच्चों की जानकारी संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज और अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को आधार नंबर से सत्यापित करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।