हिसार। बीमारियों के प्रति जागरूक न होना लोगों को अधिक बीमार करता हैं। स्वास्थ्य को लेकर अधिकतर लोग चिंतित नहीं हैं ऐसे में वे आसानी से बीमारियों की जकड़ में आ जाते हैं। इसके अलावा लोगों को तक सही इलाज न पहुंचना और इलाज मंहगा होने के कारण भी लोग अपने स्वास्थ्य पर कम ध्यान देते हैं। ये बात जीजेयू में आयोजित सेमिनार में उजाला सिग्नस के निदेशक डॉ. शुचिन बजाज ने कही। उन्होंने नोवल वायरस और इन्फ्लूएंजा के बारे में भी जानकारी दी।
डॉ. बजाज ने कहा कि देश में महंगे हो रहे इलाज को सस्ती दरों पर आम लोगों तक पहुंचाकर लोगों का स्वस्थ रखा जा सकता हैं। इसके लिए सरकार को मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ानी होंगी और मेडिकल कोर्स की फीस भी कम करनी होगी। इसके अलावा हर छोटे शहर में उचित सुविधाओं से लैस नए अस्पताल बनाने होंगे। उनमें ऑपरेशन या इलाज के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए।
नोवल वायरस का इलाज पहली बार में होना मुश्किल होता हैं। ये ऐसे वायरस होते हैं जिनका पहले से पता नहीं होता, इस कारण इनके लिए दवा बनाने में समय लगता हैं। वहीं कुछ वायरस ऐसे होते हैं जो मानव शरीर या पशुओं में ही जीवित रहते हैं उनके लिए लैब में दवा तैयार करना बहुत मुश्किल होता है। क्योकि इसके लिए परीक्षण करने में परेशानी आती है।
हृदय रोगियों की सर्जरी की संख्या बढ़नी चाहिए
डॉ. बजाज ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार एक लाख लोगों पर 100 सर्जरी महीने की होनी चाहिए, वहीं लैंसेट आयोग के अनुसार 1 लाख लोगों पर हर साल 5000 हजार सर्जरी होनी चाहिए, जिससे हृदय रोगियों की जान बचाई जा सके। इसके विपरीत हमारे देश में सालाना 1500 सर्जरी ही हो रही हैं।