हिसार। बच्चों को बचपन से ही अच्छे संस्कार देने की जरूरत है। अभिभावक बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ें। नैतिक मूल्य और संस्कार निर्णय और व्यवहार को सही दिशा देते हैं। यह बात कथा व्यास संत गोपीराम महाराज ने गीता भवन मंदिर में रविवार को श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि बाल लीलाओं से प्रभु श्रीराम मानव जाति को अध्यात्म की ओर अग्रसर करते हैं। प्रभु का जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य एवं अलौकिक हुआ करता है। एक मानव जब कर्म करता है तो उसका परिणाम ये निकलता है कि उसके सामने गुलामी की जंजीरें तैयार हो जाती हैं और प्रभु एक इंसान को गुलामी के बंधनों से स्वतंत्र करता है। ये उसका आलौकिक कर्म होता है।
उन्होंने कहा कि प्रभु के दो स्वरूप होते हैं। एक निराकार और दूसरा साकार। निराकार रूप प्रकाश है और साकार रूप अर्थात प्रभु देह धारण कर संतों के रुप में इस धरा पर अवतार लेते हैं। ये प्रभु का साकार रूप होता है। प्रभु जब संसार में अवतार लेते हैं तो वो मानव की बाजू पकड़कर उसे धर्म के राजमार्ग पर चलाते हैं। मंच संचालन करते हुए भजन गायक सुमित मित्तल ने भजनों की वर्षा की।