बास (हिसार)। गांव डाटा से दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है। एक गरीब परिवार के बेटे बबलू (32) और बेटी मुकेश कुमारी (29) की करीब 14-15 साल पहले दोनों किडनी फेल हो गई थी। उस समय पिता लक्ष्मन ने बेटे बबलू को और मां संजना ने बेटी मुकेश कुमारी को अपनी-अपनी एक-एक किडनी दान कर दी। दुर्भाग्यवश बेटी की कुछ समय बाद मौत हो गई। अब बेटा बबलू भी जिंदगी और मौत के बीच घर पर ही संघर्ष कर रहा है।
पिता लक्ष्मन ने बताया कि इलाज के लिए करीब एक करोड़ रुपये की जरूरत है। परिवार पहले ही इलाज में अपनी सारी जमीन-जायदाद गंवा चुका है। कानूनी अड़चनें भी इलाज में मुश्किल बन रही हैं। देश में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए केवल रक्त संबंधी या ब्रेन डेड अंगदाता से ही किडनी ली जा सकती है, जिससे बबलू का मामला और भी जटिल हो गया है।
ग्रामीणों ने बबलू की मदद का बीड़ा उठाया
ग्रामीण, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि आर्थिक मदद और अंगदान के लिए अपील कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बबलू की मदद के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गांव से लेकर शहर तक दुआएं और डोनेशन की अपील की जा रही हैं।
बबलू के माता-पिता का त्याग अद्भुत है। हम सभी का फर्ज है कि इस संघर्ष में उनका साथ दें। मैं व्यक्तिगत और राजनीतिक स्तर पर हरसंभव सहायता कर रहा हूं।- जस्सी पेटवाड़, विधायक, नारनौंद।
यह मानवीय संवेदना का विषय है। बबलू को बचाने के लिए समाज को एकजुट होना होगा। मैंने आर्थिक सहायता दी है और आगे भी मदद करता रहूंगा। - विनोद भयाना, विधायक, हांसी।
गरीब की मदद करना हमारी जिम्मेदारी है। मैं लगातार परिवार के संपर्क में हूं और सरकार से भी विशेष सहायता की मांग करूंगा।- रामकुमार गौतम, विधायक, सफीदो।
मेरे गांव डाटा का यह परिवार सचमुच मदद का हकदार है। हर गांववासी, हर नेता, हर इंसान को अपनी क्षमता के अनुसार मदद करनी चाहिए। मैं इस मुहिम का हिस्सा बन गर्व महसूस करता हूं। - सोनू डाटा, चेयरमैन, नगर परिषद।