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Hisar News: अब पंचायतें संभालेंगी पेयजल आपूर्ति की जिम्मेदारी, सुधरेगी गुणवत्ता

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जिले के गांव मय्यड़ में जल अर्पण ग्राम सभा में भाग लेते ग्रामीण।
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हिसार। गांवों में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था ग्राम पंचायतों को सौंपने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जल अर्पण मॉड्यूल के तहत जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग अगले दो महीने में इसे पूरा कर देगा। प्रदेश की 6600 ग्राम पंचायतों में से अब तक 2658 ने नई व्यवस्था अपनाने पर सहमति दे दी है। यानी करीब 40 प्रतिशत पंचायतें पेयजल व्यवस्था का जिम्मा संभालने के लिए तैयार हैं।
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सहमति देने के मामले में मुख्यमंत्री नायब सैनी का गृह जिला कुरुक्षेत्र सबसे आगे है जबकि गुरुग्राम सबसे पीछे है। कुरुक्षेत्र की 420 में से 295 पंचायतों ने सहमति दी है। गुरुग्राम की 173 में से केवल 19 पंचायतें ही तैयार हुई हैं। हांसी-हिसार सहित प्रदेश के 22 जिलों में से 12 ऐसे हैं जहां सहमति देने वाली पंचायतों की संख्या अभी 100 तक नहीं पहुंची है। शेष जिलों में 100 से अधिक पंचायतों ने नई व्यवस्था अपनाने पर सहमति दी है।

क्या होगा फायदा

- गांव की पेयजल व्यवस्था के प्रबंधन में ग्राम पंचायत की भूमिका बढ़ेगी।

- पानी की टंकी, पाइपलाइन और अन्य सुविधाओं के रखरखाव की स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी।

- योजना के हस्तांतरण की प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

- ग्रामीणों की भागीदारी से नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।



क्या है जल अर्पण मॉड्यूल

जल अर्पण मॉड्यूल जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाओं की जांच, डिजिटल सत्यापन और उन्हें ग्राम पंचायतों को सौंपने की प्रक्रिया को ऑनलाइन दर्ज करने वाली व्यवस्था है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों में नल से जलापूर्ति की योजनाएं पूरी तरह चालू हों और उनके संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी स्थानीय समुदाय प्रभावी ढंग से संभाल सके। इसमें कई चरण शामिल हैं।
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- रेडी फॉर जल अर्पण मॉड्यूल: इसमें वे गांव शामिल हैं जहां सभी पेयजल योजनाओं का भौतिक कार्य पूरा होने के साथ उन्हें चालू भी कर दिया गया है और गांव जल अर्पण के लिए तैयार है।

- जल अर्पण एंट्री: इस चरण में उन गांवों को शामिल किया जाता है जहां मॉड्यूल में जानकारी भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

- ट्रायल रन पूरा: इसमें वे गांव आते हैं जहां जल अर्पण एंट्री शुरू होने के बाद पेयजल योजनाओं का परीक्षण पूरा कर लिया गया है।

- जल अर्पण दिवस: इस चरण में उन गांवों को शामिल किया जाता है जहां मॉड्यूल में एंट्री के साथ योजनाओं को समुदाय को सौंपने की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है।

- हर घर जल प्रमाणित गांव: ऐसे गांव जहां मॉड्यूल के सभी जरूरी चरण पूरे होने के बाद प्रमाणपत्र जारी हो चुका है।



जल अर्पण मॉड्यूल के लिए सहमति देने वाले गांव

जिला कुल गांव सहमति वाले गांव

यमुनानगर 601 275

फतेहाबाद 275 228

सिरसा 334 209

हिसार 260 178

पानीपत 178 154

नूंह 414 151

कैथल 283 149

जींद 300 143

पलवल 279 103

सोनीपत 314 99

रेवाड़ी 394 97

महेंद्रगढ़ 362 96

करनाल 427 91

अंबाला 444 84

फरीदाबाद 120 59

भिवानी 313 58

झज्जर 247 55

पंचकूला 165 49

रोहतक 127 35

चरखी दादरी 170 31

गुरुग्राम 173 19

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पेयजल व्यवस्था का जिम्मा पंचायतों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। हिसार और हांसी में 40 ग्राम पंचायतों के साथ जनस्वास्थ्य विभाग का एमओयू हो चुका है। पेयजल व्यवस्था से संबंधित कामकाज के लिए पंचायतों को अनुदान दिया जाएगा। यह राशि साल में हर तीन महीने बाद यानी चार किस्तों में दी जाएगी। - विनोद कुमार, जिला सलाहकार, जल स्वच्छता एवं सहयोग संगठन
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