हिसार। रोडवेज की नई बसों में जहां प्राथमिक उपचार बॉक्स (एफएबी) सहित सभी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं, वहीं पुरानी बसों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद लचर है। कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तक नहीं हैं। वहीं जहां हैं भी वे सीटों के नीचे या सामान रखने की रैक में रखे मिले। कई बॉक्सों में रखी दवाओं की मियाद पूरी हो चुकी है, जबकि कुछ दवाएं गंदगी और ग्रीस से खराब हो चुकी हैं।
सर्दी के मौसम में कोहरा, फॉग और पाला पड़ने से दृश्यता घट जाती है और सड़क पर फिसलन बढ़ जाती है, जिससे हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में बसों में एफएबी और अग्निशामक यंत्रों का होना अनिवार्य है। इनकी जांच की जिम्मेदारी आउटस्टैंडिंग अधिकारी की है, लेकिन पड़ताल में यह जिम्मेदारी महज औपचारिकता साबित हुई।
अमर उजाला की पड़ताल में खुलासा हुआ कि ये बसें चंडीगढ़ जैसी लंबी दूरी के साथ-साथ स्याहड़वा और तलवंडी राणा जैसे ग्रामीण मार्गों पर चल रही हैं, लेकिन अधिकांश पुरानी बसों में सुरक्षा उपकरण अनुपलब्ध हैं। जहां एफएबी मौजूद भी थे, उन्हें निर्धारित स्थान और चालक सीट के पास पर नहीं रखा गया था।
पड़ताल में कई बसों में नहीं मिला फर्स्ट एड बॉक्स
कैथल डिपो की बस संख्या एचआर 64ए 4842 में दवाओं की एक्सपायरी डेट मिट चुकी थी। पैकेट पर लगी काली ग्रीस के कारण दवाएं प्रयोग योग्य नहीं हैं।
बस संख्या एचआर 39जीवी 2861 में बॉक्स मिला ही नहीं। चालक जिया लाल ने बताया कि वह चंडीगढ़ से लौटे हैं और कर्मशाला में नया बॉक्स लगवाने जा रहे हैं।
बस संख्या एचआर 39जीवी 7850 के चालक ने बताया कि कुछ दिन पहले बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, इसलिए उसका एफएबी दूसरी बस में रख दिया गया है।
गांव स्याहड़वा जा रही बस संख्या एचआर 39जीवी 9818 और एचआर 39ई 5686 में भी फर्स्ट एड बॉक्स नहीं मिला।
डिपो परिसर में खड़ी हैं सात जर्जर बसें
रोडवेज प्रबंधन ने मियाद पूरी कर चुकी सात जर्जर बसों को डिपो परिसर में खड़ा कर दिया है। अब इनकी नीलामी प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है। डिपो में दो दिन पहले 12 नई बसों का संचालन शुरू हुआ है, जबकि 20 नई बसें और मिली हैं। फिलहाल इन बसों के टैक्स, परमिट, फिटनेस और बीमा से संबंधित औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई बसें जल्द सड़कों पर उतरेंगी।
हर डिपो में आउटस्टैंडिंग अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। वह सुबह तीन बजे से रोज ड्यूटी पर आकर कर्मशाला में पहुंची बस के रखरखाव का निरीक्षण करते हैं। उनको फास्टैग समेत सभी जरूरी संसाधन दिखाने के बाद ही बस चालक को सौंपी जाती है। उनकी वर्दी और स्टैपनी समेत सुरक्षा के अन्य सभी मानक भी रोज पूरे कराए जाते हैं। एफएबी में रुई, मरहम, पट्टी, कैंची, बीटाडीन समेत बुखार, बदन दर्द और उल्टी रोकने की दवा रखी जाती है।
- रमेश, निरीक्षक, रोडवेज डिपो, हिसार।