हिसार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि राम मंदिर बन गया है अब रामराज्य की कल्पना होनी चाहिए। अगर, प्रजा 100 रुपये कमाती है तो राजा को 1,000 रुपये में जीना चाहिए। इससे समाज में असमानता नहीं बढ़ती। आज के समय में देश में मजदूर को भी जीवनयापन के लिए 50,000 रुपये महीना चाहिए। देश में मजदूर 50 रुपये में भी अपना पेट भर सकता है। मगर, डॉलर और पाउंड में ऐसा नहीं कर सकते। इसलिए देश में शोषण मुक्त करेंसी की व्यवस्था होनी चाहिए। प्राचीन समय में देश में सोने-चांदी को ही करेंसी मानते थे।
डॉ. इंद्रेश कुमार मंगलवार को गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी (जीजेयू) में चौधरी रणबीर सिंह सभागार में अर्थशास्त्री दत्तोपंत ठेंगड़ी की चेयर की स्थापना के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अर्थशास्त्री ''दत्तोपंत ठेंगड़ी और विकसित भारत 2047'' विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि ठेंगड़ी का मानना था कि वर्ग संघर्ष के बजाय वर्ग सौहार्द आवश्यक है। रामराज्य के स्वप्न को साकार करने के लिए अमीर और गरीब के बीच की खाई को समाप्त करना होगा।
डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना दत्तोपंत ठेंगड़ी के सिद्धांतों को अपनाकर ही पूरा किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय में स्थापित पीठ कदाचित देश में अपनी तरह की पहली पीठ है। इस पीठ के माध्यम से शोधार्थी दत्तोपंत ठेंगड़ी के आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय सिद्धांतों का मूल्यांकन, विश्लेषण और उन पर शोध करके राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे।
क्षेत्रीय संगठन सचिव पवन कुमार ने भारतीय मजदूर संघ के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 23 जुलाई 1955 को दत्तोपंत ठेंगड़ी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की थी। करीब 50 करोड़ मजदूर व कर्मचारी इसमें जुड़े हैं। इसमें से केवल सात प्रतिशत ही संगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। दत्तोपंत ठेंगड़ी के सिद्धांतों पर चलकर ही शोषण को रोका जा सकता है।
कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि संयोग से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक व चंद्रशेखर आजाद के जन्मदिवस और भारतीय मजदूर संघ की स्थापना दिवस पर स्थापित महान अर्थशास्त्री दत्तोपंत ठेंगड़ी पीठ विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। सबका साथ सबका विकास तथा वोकल फोर लोकल जैसे अभियान दत्तोपंत ठेंगड़ी के सिद्धांतों की ही देन है। वहीं, डॉ. इंद्रेश कुमार ने विश्वविद्यालय के गुरु जम्भेश्वर महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान परिसर में पौधरोपण किया। इस उपलक्ष्य पर विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर पुस्तकालय में एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।