हिसार। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्व विद्यालय (लुवास) की लैब में अगले सप्ताह से स्वाइन फ्लू की जांच शुरू हो जाएगी। इसके लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।लैब में हरियाणा के अलावा पंजाब, राजस्थान व हिमांचल से भी जानवरों के सैंपल आएंगे। जांच रिपोर्ट 24 घंटे में ईमेल के जरिये संबंधित जिले के पशुपालन विभाग को भेज दी जाएगी। इससे पहले इसी लैब में उत्तर भारत के राज्यों से एलएसडी के आए सैंपल की जांच हो रही थी।
स्वाइन फ्लू की जांच के लिए अभी हरियाणा में कोई सुविधा मौजूद नहीं थी। इस बीमारी के लक्षण दिखने पर संक्रमित पशुओं का सैंपल मध्यप्रदेश के भोपाल शहर स्थित केंद्रीय लैब को भेजा जाता था। बीते दिनों गोवंश में फैली बीमारी एलएसडी (लंपी) के वक्त भी ऐसी दिक्कत आई थी। इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने हिसार के लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की लैब को उच्चीकृत करने का निर्णय लिया था। लुवास की लैब को पहले एलएसडी की जांच के लिए अनुमति मिली थी। जांच की प्रक्रिया व नतीजे बेहतर आए तो अब इसे स्वाइन फ्लू की जांच के लिए भी अनुमति मिल गई है। जांच के लिए पशुपालन विभाग अपने इलाके से सैंपल एकत्रित कर विश्वविद्यालय की लैब को भेजेगा।
एलएसडी जांच का अनुभव आएगा काम
लुवास की लैब के प्रभारी डॉ. राजेश खुराना बताते हैं कि हमारे यहां कर्मचारियों की संख्या, उपकरण व जांच किट आदि की उपलब्धता पहले से ही मौजूद है। एलएसडी की जांच से हमारे कर्मचारियों का अनुभव और बेहतर हुआ है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए भी जरूरी तकनीकि व उपकरण मिल चुके हैं। लैब पहले से ही क्रियाशील है। सभी स्टॉफ इस नए अनुभव के लिए खुद को तैयार कर चुके हैं।
भोपाल से रिपोर्ट आने में होती थी देरी
लुवास के पीआरओ डॉ. अशोक मलिक बताते हैं कि स्वाइन फ्लू के मामले अगर विश्व विद्यालय से संबद्घ अस्पताल में आते थे, तो जांच व पुष्टि के लिए सैंपल भोपाल जाता था। वहां से जांच होने व रिपोर्ट मिलने में 10 से 15 दिन का समय लग जाता था। कई बार संक्रमित पशु ठीक भी हो जाता था और तब तक रिपोर्ट नहीं मिल पाती थी। अब यहीं जांच होने से रिपोर्ट जल्दी मिलेगी, जिससे बीमारी के इलाज में मदद मिलेगी। इससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सकेगा।
एलएसडी के बाद अब स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा मिलने से पशुपालकों के साथ-साथ पशु चिकित्सकों को भी सुविधा मिली है। हमारे विश्वविद्यालय के लिए भी यह खास उपलब्धि है। इससे शैक्षणिक गतिविधियों में भी फायदा पहुंचता है। इससे भी अहम बात यह है कि हमारे संस्थान की केंद्रीय स्तर पर विश्वसनीयता लगातार बढ़ रही है। - प्रो. विनोद कुमार वर्मा, कुलपति, लुवास