भाटला का सामाजिक बहिष्कार प्रकरण में सबसे पहले दर्ज मुकदमे में तत्कालीन जांच अधिकारी नरेंद्र कादियान पुलिस उपाधीक्षक, थाना सदर प्रभारी और जांच टीम के सदस्य पुलिस सहायक उपनिरीक्षक धर्मपाल को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने नोटिस जारी किया है। अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने किशोर न्यायालय जसवीर कुमारी की अदालत में आरोपियों के पक्ष में झूठी गवाही दी थी।
शिकायतकर्ता कुलदीप भाटला ने अपनी आयोग को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके व अन्य अनुसूचित जाति युवकों के साथ-साथ 15 जून 2017 को गांव के सार्वजनिक हैंडपंप पर सवर्ण युवकों ने पहले पानी भरने पर मारपीट की थी। जिस बारे में थाना सदर में एससी एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र कादियान व तत्कालीन हांसी थाना सदर प्रभारी व पुलिस सहायक उपनिरीक्षक धर्मपाल ने जांच की थी। पीड़ितों के अधिवक्ता रजत कलसन ने बताया कि इन तीनों जांच अधिकारियों के समक्ष पीड़ितों ने अपने बयान दर्ज कराए थे। उन बयानों में उन्होंने जातिगत अत्याचार व जातिसूचक गाली देने की बात कही थी। इसके बाद जब किशोर न्यायालय में गवाही हुई तब भी इन पीड़ित युवकों ने अदालत को जाति सूचक शब्द कहने वाली बातें दोहराई थी। जांच करने वाले पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र कादियान, इंस्पेक्टर उदयभान व सहायक उपनिरीक्षक धर्मपाल ने उक्त केस की अंतिम जांच रिपोर्ट में जातीय उत्पीड़न की बात मानी थी। अदालत में तीनों पुलिस अधिकारी गवाही के दौरान पुलिस फाइल के अपने आधिकारिक बयान से मुकर गए। तीनों अधिकारियों के इस बयान का उल्लेख करते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था। इस बारे में पीड़ित कुलदीप ने हरियाणा के गृह मंत्री, हरियाणा के पुलिस महानिदेशक, हिसार के पुलिस महानिरीक्षक, हांसी की एसपी सहित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को शिकायत की थी।