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गुरु की प्रेरणा ने बनाया द्रोणाचार्य

Sun, 09 Oct 2016 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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vijay Agrawal - फोटो : Bureau
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गुरु का आशीर्वाद और कड़ी मेहनत के बलबूते इंसान पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर सकता है। क्षेत्र चाहे कोई भी हो, सफलता के पीछे एक गुरु का होना जरूरी होता है। या यूं कहिए कि गुरु ही होता है जो मिट्टी को तराश कर उसे सोना बनाता है। ऐसे ही एक गुरु हैं न्यू मॉडल टाउन के कराटे कोच विजय अग्रवाल। मात्र 28 वर्षीय इस कोच के दो शिष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना दमखम दिखा रहे हैं। इसके साथ ही वे आज कराटे नेशनल फेडरेशन के कोच भी हैं।
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सेल्फ डिफेेंस के लिए सिखना शुरू किया था
कोच विजय अग्रवाल ने 20 वर्ष की उम्र में सेल्फ डिफेंस के लिए खेलना शुरू किया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल सुरक्षा के नजरिए से ही कोच हरीश सिराधना के पास ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते।

150 से अधिक खिलाड़ी ले रहे प्रशिक्षण
कोच विजय अग्रवाल के पास करीब 150 खिलाड़ी कराटे के प्रशिक्षण के लिए आते हैं। जिनमें से 50 से अधिक लड़कियां हैं। उन्होंने बताया कि वे 2012 से खिलाड़ियों को कराटे सिखा रहे हैं। वे अपने इस हुनर के पीछे गुरु हरीश सिराधना का हाथ मानते हैं। जो स्वयं एक जाने माने कोच हैं।
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ये कामयाबी रही
- 2010 में नेपाल के काठमांडू में हुई इंडो-नेपाल कराटे चैंपियनशिप में सिल्वर।
- 2011 में इंडो-नेपाल कराटे चैंपियनशिप में हिस्सा।
- 2012 में इंडो-नेपाल कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल।

8 राष्ट्रीय और 2 अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी
उनके शिष्य यशबीर ने 2015 में कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता था। वहीं दूसरे शिष्य गौरव राय ने हाल ही में आयोजित हुई साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल किया था। इसके बाद गौरव का चयन इंडोनेशिया में होने वाली एशियन चैंपियनशिप के लिए हुआ है। इसके अलावा उनकी एक अन्य शिष्या ने हाल ही में नेशनल स्कूली गेम में गोल्ड मेडल जीता था।
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