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14 साल पहले हैंडबाल थामी तो पड़ोसियों ने मारे ताने, अब खिलाड़ियों की पौध तैयारी करेगी सोनिया

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हिसार। 14 साल पहले लितानी की सोनिया नैन ने गांव से हैंडबाल की शुरुआत की तो पड़ोसियों ने खेलने से मना करते हुए ताने मारे। हालांकि सोनिया के माता-पिता का सपना था कि बेटी खेल में आगे बढ़े और पदक जीतकर देश का नाम चमकाए। पड़ोसियों की बात को अनसुना कर सोनिया ने खेल मैदान में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया और पीछे मुड़कर नहीं देखा। सोनिया ने जब पदकों की झड़ी लगानी शुरू की तो वही पड़ोसी गांव की अन्य बेटियों को खेल के लिए प्रेरित करने लगे।
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अब सोनिया ने खेल विभाग में जूनियर हैंडबाल कोच के पद पर ज्वाइन किया है। अब वह खिलाड़ियों की पौध तैयार करेगी। सोमवार को पंचकूला हेड क्वार्टर में सोनिया को खेल निदेशक पंकज नैन ने प्रशिक्षक के पद पर ज्वाइन कराया। सोनिया ने अपने खेल कॅरिअर में चार बार भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। सोनिया बताती है कि जब वह सातवीं कक्षा में थी, तब उसने लितानी के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पीटीआई रामकुमार के पास प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। 12वीं पास करने के बाद उसने महाबीर स्टेडियम में कोच सतपाल ढांडा और अनूप कस्वां से प्रशिक्षण लिया। सोनिया ने बताया कि उसने वर्ष 2012 में नेपाल में हुई अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था।
माता-पिता का सहयोग जरूरी, तभी बढ़ पाई आगे
सोनिया बताती है कि यहां तक पहुंचाने में माता-पिता का काफी सहयोग रहा है। पिता हमेशा से ही मुझे खेल में आगे बढ़ाते रहे। सोनिया के पिता सत्यपाल नैन आर्मी से हवलदार के पद से सेवानिवृत्त हैं जबकि माता संतोष देवी गृहिणी हैं। सोनिया तीन बहनं और एक भाई हैं।
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हरियाणा सरकार की खेल पॉलिसी का फायदा खिलाड़ियों को मिल रहा है। काफी खुशी की बात है कि सोनिया ने खेल के दम पर नौकरी पाई है। सोनिया से अन्य बेटियों को भी प्रेरणा मिलेगी। यदि खिलाड़ी मेहनत करता है तो वह अपना मुकाम जरूर हासिल करता है। - अनूप कस्वां, हैंडबाल कोच
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