नगर निगम प्रशासन की ओर से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए खरीदी गई 20 ई-रिक्शा 10 माह में ही कबाड़ बन गई हैं। 20 में से आठ ई-रिक्शा तो पूरी तरह खराब हो चुकी है। जिन्हें अब निगम के कबाड़ में छोड़ दिया गया है। जहां बारिश व धूल के कारण उन्हें जंग लगने लगी हैं। ये ई-रिक्शा शहर में कचरा लाने के लिए भेजने की हालत में ही नहीं है। ऐसे में शहर को स्वच्छ बनाने के दावे हवा-हवाई होते नजर आ रहे हैं। दरअसल, निगम प्रशासन द्वारा अक्तूबर 2018 में इन ई-रिक्शा को शहर की संकरी व छोटी गलियों में जाकर प्रत्येक घर से कचरा लाने के लिए चलाया गया था। मगर ई-रिक्शा एक साल तक ही बेहतर ढंग से नहीं चल पाए हैं।
मार्च-अप्रैल 2018 में ही कंपनी ने दे दी थी डिलीवरी
निगम प्रशासन द्वारा 2018 में 40 ई-रिक्शा खरीदने की स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद स्वच्छता शाखा द्वारा पहले चरण में 20 ई-रिक्शा हिसार व गुरुग्राम की दो अलग-अलग कंपनियों से खरीदी गई थी। एक ई-रिक्शा की कीमत 1 लाख 64 हजार 700 रुपये थी। इस हिसाब से 20 ई-रिक्शा 32 लाख 94 हजार रुपये में खरीदी गई थी। हिसार की कंपनी ने 16 मार्च 2018 जबकि गुरुग्राम की कंपनी ने 20 अप्रैल 2018 को ई-रिक्शा की डिलीवरी की थी। करीब छह महीने तक निगम कार्यालय में ही ई-रिक्शा खड़ी रही। उसके बाद कर्मचारी भर्ती कर इन्हें शहर में भेजा गया।
वारंटी-गारंटी सब खत्म, 13 लाख तो डूब गए
इन ई-रिक्शा की एक साल की वारंटी भी दी थी। मगर यह वारंटी करीब चार माह पूर्व 30 अप्रैल 2019 को खत्म हो चुकी है। मोटर व बैटरी की भी एक साल की गारंटी थी। उसकी अवधि भी पूरी हो चुकी है। ऐसे हालातों में खराब हुई आठ ई-रिक्शा के 13 लाख 17 हजार 600 रुपये तो डूबे जैसे हो गए हैं। निगम अधिकारियों को इन खराब ई-रिक्शा को कबाड़ के भाव ही बेचना पड़ेगा।
आज तक नहीं भरी गई लॉग-बुक
खास बात यह भी है कि 10 महीने चलने के बाद ई-रिक्शा कबाड़ बनने लगी है लेकिन आज तक इनकी लॉग-बुक नहीं भरी गई है। कौन सी ई-रिक्शा किस रूट पर जा रही है, इसका कोई लिखित प्रमाण नहीं है। कर्मचारी अधिकारियों की मनमर्जी के हिसाब से तय की गई जगहों से कचरा उठाने ई-रिक्शा लेकर चले जाते हैं।
बाकी बची 12 ई-रिक्शा भी कंडम
20 में से बाकी बची 12 ई-रिक्शाओं के हालात भी कंडम जैसे ही हैं। किसी की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है तो कोई रास्ते में ही रूक जाती हैं। इन ई-रिक्शा को चला रहे ड्राइवरों की मानें तो ओवरब्रिज पर चढ़ाते समय ई-रिक्शा का दम निकलने लगता है। इसलिए अधिकतर ड्राइवर इन्हें ओवरब्रिजों पर चढ़ाने से झिझकते हैं।
ई-रिक्शा किस कंडीशन में हैं, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। सोमवार को स्वच्छता शाखा के अधिकारियों से इसके बारे में जानकारी लूंगा। अगर ई-रिक्शा की मरम्मत हो सकेगी तो करवाएंगे। बाकी हर घर से कचरा उठाने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम।