नगर निगम में कर्मचारियों को बदलते ही हाउस टैक्स ब्रांच में खामियों की परतें खुलने लगी हैं। निगम अधिकारियों ने इस फेरबदल के बाद कैश रसीद बुक का बड़ा मामला पकड़ा है। टैक्स ब्रांच में 987 कैश रसीद बुक ऐसी हैं जिनमें से रिकॉर्ड उतारा ही नहीं गया। स्टॉक रजिस्टर से जी 8 बुक जारी तो की गई है, मगर 4 साल से इन्हें वापस जमा नहीं करवाया गया। इतना ही नहीं इनमें कई रसीद गायब भी बताई गई हैं। मामले के बाद नगर निगम में हड़कंप मचा हुआ है। जी 8 गायब होने की चर्चाएं भी चल रही हैं। उधर टैक्स ब्रांच से बदले गए कर्मचारियों से अधिकारी जवाब तलब कर रहे हैं।
इंटरनल ऑडिट के लिए लिखा
नगर निगम अधिकारियों ने इस मामले में जांच के लिए लिखा है। सीनियर एकाउंट ऑफिसर व सचिव नगर निगम ने नोटिंग कर डीसी के पास फाइल भेज दी है। इसमें लिखा गया है कि इतनी सारी रसीद बुक में घपले की आशंका हो सकती है। इस ब्रांच की इंटरनल ऑडिट करवाई जाए। ताकि असलियत सामने आ सके कि आखिर घालमेल है या नहीं। अगर घालमेल मिलता है तो निगम के कुछ अधिकारियों का कहना है कि घपला 30 लाख से ज्यादा का मिलेगा।
कई सालों से नहीं हुई ऑडिट
नगर निगम में कई सालों से ऑडिट नहीं हुई है। अमर उजाला ने ऑडिट से संबंधित पहले भी खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद तत्कालीन डीसी एवं कमिश्नर चंद्रशेखर खरे ने निगम अधिकारियों को लिखित में आदेश दिए थे कि वे ऑडिट करवाएं। इसके बावजूद निगम अधिकारियों ने ऑडिट नहीं करवाया।
दस दिन में उपलब्ध कराएं रिकॉर्ड
निगम सचिव व सीनियर एकाउंट ऑफिसर सोमवार को मामला डीसी एवं नगर निगम कमिश्नर के समक्ष लेकर पहुंचे। कमिश्नर ने रिटायर्ड कर्मचारी लक्ष्मण सैनी, लिपिक राजकुमार व एक अन्य कर्मचारी को दस दिन के अंदर अंदर रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के लिए लिखा है। इसके अलावा इंटरनल ऑडिट के लिए कमिश्नर ने आदेश दे दिए हैं।
सभी ब्रांचों में गिर सकती है गाज
नगर निगम में कई ब्रांचों पर गाज गिर सकती है। वर्ष 2013 से तहबाजारी ब्रांच, जरनल ब्रांच, इलेक्ट्रिकल ब्रांच, टेक्निकल ब्रांच व रेंट ब्रांच की रसीद बुक अभी तक स्टॉक रजिस्टर में जमा करवाने की एंट्री नहीं है। इस मामले के बाद पूरे नगर निगम के कर्मचारियों में हंगामा मचा हुआ है।
एक कर्मचारी हो चुका है बर्खास्त
नगर निगम में वर्ष 2006-07 में टैक्स ब्रांच का एक कर्मचारी गबन मामले में फंस गया था। उस पर जी 8 यानी कैश रसीद बुक गायब करने का आरोप था। प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच में यह लाखों रुपये का घपला था। कुछ रसीद बुक उस पर जलाने का आरोप भी था, जिसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया था।
हमने कमिश्नर साहब को ऑडिट के लिए लिखा है। जांच की जाएगी इसके बाद असल मामला पता चलेगा। रिटायर्ड कर्मचारी सहित तीन कर्मचारियों को दस दिन के अंदर-अंदर रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया है।
- यूएस परमार, सीनियर एकाउंट ऑफिसर, नगर निगम