पांचवें फाइनेंस कमीशन के साथ नगर निगम अधिकारियों व पार्षदों की मीटिंग में नगर निगम की खूब मिट्टीपलीत हुई। निगम की आय बढ़ाने को लेकर रिपोर्ट तैयार करने से पहले आयोग द्वारा लिए गए आय और व्यय के ब्योरे पर अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे पाए। अधिकारियों को पार्षदों व कमीशन के अधिकारियों के सामने मुंह की खानी पड़ी। हैरानी तो तब हुई जब आयोग ने सवाल किया कि ब्योरे के अनुसार यहां आय तो कुछ भी नहीं है। ऐसे में सैलरी एडजेस्ट कैसे होती है। इस पर सीनियर अकाउंट ऑफिसर उग्रसेन परमार ने कहा कि सेल ऑफ लैंड में एडजेस्ट कर लेते हैं सर। इस पर आयोग हैरान हो गया। उन्होंने हैरानी जताई और कहा कि अच्छा सैलरी देने के लिए आप जमीन भी बेच देते हो। ऐसे सवाल के बाद निगम अधिकारी चुप रह गए।
एक्सईएन बोले 3 करोड़ की दे दी सैलरी
निगम अधिकारियों द्वारा दी गई प्रेजेंटेशन के समय कमीशन के चेयरमैन मुकुल ने सवाल उठाया कि वर्ष 2014-15 में इनकम निगम ने 31 करोड़ दिखाई है और एक्सपेंडेचर (खर्च) 28.54 करोड़ बाकी ढाई करोड़ कहां गए। इस पर एक्सईएन रामजीलाल ने सवाल गोलमाल कर दिया। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष यानी अप्रैल महीने की कर्मचारियों को सैलरी दे दी। इस पर कमीशन ने कहा कि ऐसे कैसे सैलरी बजट अलग होता है। कमीशन चेयरमैन ने इस पर गुस्सा भी जताया। अधिकारियों की कमीशन के सामने बोलती बंद हो गई। रही कसर कुछ पार्षदों ने निकाल दी।
एक्सईएन बोले भगवान की दया दृष्टि है
कमीशन के सदस्यों ने सवाल किया कि आपके शहर के किसी हिस्से में आग लग जाए तो आप कम से कम कितने समय में घटना स्थल पर पहुंच सकते हो। इस पर एक्सईएन रामजीलाल ने जवाब दिया सर भगवान की दया दृष्टि है ऐसा कभी नहीं हुआ। वैसे टाइम की जानकारी नहीं। ऐसा सुनते ही पार्षद राजपाल मांडू खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि मेरी फैक्टरी में करोड़ों को नुकसान हो गया। 40 मिनट बाद पहुंची दमकल की गाड़ी। कमीशन ने सुझाव दिया कि शहर में कुछ ऐसे प्वाइंट बनाओ जहां आपकी गाड़ी खड़ी हो सके। पूरे शहर को कवर करना जरूरी है।
डिप्टी मेयर ने खोली पोल
मीटिंग में कांग्रेसी पार्षद सीनियर डिप्टी मेयर दयानंद सैनी को जब बोलने का मौका मिला तो उन्होंने निगम की खूबियां गिनानी शुरू कर दीं। कहा अधिकारी अच्छे हैं काम खूब हो रहे हैं। इनकम भी ठीक है कुछ और इनकम बढ़ाई जा सकती है इसको लेकर डबल स्टोरी दुकानें बनाई जा सकती हैं। उधर डिप्टी मेयर भीम महाजन ने तो निगम की पोल खोलकर रख दी। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी इनकम सोर्स पर ध्यान नहीं दे रहे। डेवलपमेंट का पैसा भी ये सैलरी में खर्च कर लेते हैं। पार्षद राजपाल मांडू ने कहा कि निगम की इनकम जीरो है। हालात इतने बुरे हैं कि आरएवाई के पैसे तक निगम जारी नहीं कर पा रहा। एक अधिकारी फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे, जिनके घर टूटे हुए हैं वो 7 रुपये सैकड़ा ब्याज लेकर खुद के पैसों से मकान बना रहे हैं। पार्षद नरेंद्र शर्मा ने भी निगम अधिकारियों को खूब खरी खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि कॉलोनाइजर कॉलोनी काटकर पैसे कमा रहे हैं। निगम में एक पैसे की इनकम नहीं।
ये बताए सोर्स ऑफ इनकम
- डोर टू डोर कलेक्शन।
- दरोगा ने सफाई को लेकर कोई चालान नहीं काटे इस पर ध्यान दिया जाए।
- अवैध मीट मार्केट के चालान काटें।
- रेहड़ी वालों के लिए वेंडर जोन बने।
- पेमेंट गेटवे को ऑनलाइन किया जाए।
- एडवरटाइजमेंट जोन बनाई जाए।
ये रहे मौजूद
मीटिंग में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के अलावा, ज्वाइंट कमिश्नर सरजीत नैन, पार्षद राजपाल मांडू, रेखा सैनी, नरेंद्र शर्मा, डॉ. महेंद्र जुनेजा, अजीत सिंह, सतीश मेहरा, एक्सईएन रामजीलाल, सीनियर अकाउंट ऑफिसर उग्रसेन परमार, सीनियर एसओ विक्रम लोरा, एमई प्रवीन कुमार, सचिव राजेश महता शामिल थे।