हिसार। जिले के गांव सातरोड खास में शुक्रवार शाम एक बंदर ने गली में जा रहे सात साल के बच्चे जयप्रीत पर हमला कर उसे घायल कर दिया। जब घायल जयप्रीत के चाचा नवरत्न और अन्य ने रात को बंदर को पकड़ना चाहा तो बंदर ने नवरत्न को भी काट कर घायल कर दिया।
जख्मी हालत में चाचा-भतीजा को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल ने बताया कि एक महीने में यह बंदर 100 से अधिक लोगों को काट चुका है। बंदर ने गांव में आतंक फैला रखा है।
नागरिक अस्पताल में आए सातरोड खास के नवरत्न ने बताया कि गांव में एक बंदर ने आतंक मचा रखा है। शुक्रवार शाम सात साल का भतीजा दुकान से सब्जी लेकर आ रहा था। रास्ते में एक बंदर ने हमला कर उसके हाथ पर दांतों से काट लिया। आसपास के लोगों ने भतीजे को बड़ी मुश्किल से छुड़वाया। नवरत्न ने बताया कि यह बंदर एक महीने में हमला कर लगभग 100 लोगों को घायल कर चुका है। भतीजे पर हमला होने के बाद बंदर को पकड़ने की योजना बनाई ताकि उसे जंगल में छोड़ा जा सके। आसपास के लोगों ने मिलकर रात को बंदर का पता लगाने का प्रयास किया। पता चला कि वह एक घर में घुसा हुआ है। जब उसे पकड़ने के लिए घर के अंदर गए तो बंदर ने मेरी अंगुलियों पर दांतों से काट लिया और बाद में भाग गया। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह भी बंदर ने एक बच्ची पर हमला कर उसे घायल कर दिया।
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खरड़ में कुत्ते ने बच्चे पर किया हमला
जिले के गांव खरड़ में एक कुत्ते ने हमला कर 2 साल के बच्चे दीपांशु को काटकर घायल कर दिया। लहुलुहान हालत में परिजन दीपांशु को उपचार के लिए नागरिक अस्पताल लेकर आए और रेबीज का इंजेक्शन लगवाया। खरड़ निवासी विजय ने बताया कि सुबह बेटा दीपांशु गली में खेल रहा था। इस दौरान एक कुत्ते ने बेटे को दांतों से काट लिया। बेटे के रोने की आवाज सुनकर घर से बाहर आए और कुत्ते से छुड़वाया। बेटे को जख्मी हालत में अस्पताल लेकर आए।
कुत्तों के टीकाकरण व बधियाकरण का टेंडर नहीं हुआ अलॉट तो बंदर के लिए नहीं मिली अनुमति
नगर निगम की तरफ कुत्तों के टीकाकरण व बधियाकरण को लेकर लगाया गया टेंडर अभी तक अलॉट नहीं किया गया है। अभी रेट को लेकर एजेंसी से बातचीत चल रही है। इस टेंडर के तहत पांच हजार कुत्तों का टीकाकरण व बधियाकरण किया जाना है। वहीं वन्य जीव विभाग ने बंदरों को क्लेसर के जंगल में छोड़ने पर पाबंदी लगा दी है, जिस कारण निगम प्रशासन के सामने यह अड़चन आ गई कि अगर शहर से बंदर पकड़े जाते हैं तो उन्हें कहां छोड़ा जाए। इस वजह से निगम बंदर पकड़ने का टेंडर भी नहीं लगा पा रहा है।