हिसार। पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था और सख्त कर दी है। अब कृषि विभाग सीआरएम मोबाइल एप के जरिये हर एक खेत की निगरानी करेगा और फसल अवशेष जलाने पर सीधी कार्रवाई होगी।
बुधवार को लघु सचिवालय सभागार में आयोजित बैठक में उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि फसल अवशेष जलाना न केवल पर्यावरण बल्कि मिट्टी की उर्वरता के लिए भी नुकसानदायक है। उन्होंने बताया कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत धान की फसल की ऑनलाइन वेरिफिकेशन की जाएगी।
गांव-गांव जाकर टीम करेंगी फील्ड रिपोर्टिंग
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गठित टीमें गांवों में जाकर किसानों द्वारा पंजीकृत फसल की जमीनी जांच करें। यदि किसी क्षेत्र में पराली जलाने की घटना सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर एसएमएस, बेलर, रोटावेटर जैसी मशीनें 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी जा रही हैं। उपायुक्त ने कहा कि इनका उपयोग कर पराली को खाद, चारे या ऊर्जा उत्पादन में बदला जा सकता है।
578 नोडल अधिकारी तैनात, जिले में 3 लाख एकड़ में धान
जिले में पराली जलाने की रोकथाम के लिए 578 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। येलो जोन के गांवों में हर 50 एकड़ पर और ग्रीन जोन में हर 100 एकड़ पर एक नोडल अधिकारी तैनात है। जिले में इस बार करीब 3 लाख एकड़ में धान की फसल है। अब तक पराली जलाने का एक भी केस सामने नहीं आया है, जबकि पिछले साल 49 केस दर्ज किए गए थे।
सहायक कृषि अभियंता गोपीराम सांगवान ने बताया कि सीआरएम एप के माध्यम से धान की फसल की स्थिति की निगरानी, फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दर्ज, पराली जलाने की घटनाओं की रिपोर्टिंग संभव होगी। बैठक में हिसार एसडीएम ज्योति मित्तल, हांसी एसडीएम राजेश खोथ, नारनौंद एसडीएम विकास यादव, बरवाला एसडीएम डॉ. वेदप्रकाश बेनीवाल, उप कृषि निदेशक राजवीर सिंह मौजूद रहे।