हिसार। लॉकडाउन की आहट से प्रवासी पलायन करने लग गए हैं। सिर पर सामान लादकर ट्रेन की ओर जाते रामबाबू, सुरेश, जगजीवन, प्रियांशु ने बताया कि वे उत्तरप्रदेश के बलिया के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि नोयडा में रहने वाले उनके परिचित अपने प्रदेश लौट गए हैं, जिस कारण वे भी अपने घर जाना चाहते हैं। इन लोगों ने कहा कि हम पिछले साल की तरह से फंसना नहीं चाहते।
अमर उजाला टीम ने मंगलवार को रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर यहां यात्रियों से बात की। पता लगा कि गोरखपुर को जाने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस में अगले दस दिन के लिए कोई टिकट उपलब्ध नहीं है। आरएसी का भी कोई विकल्प नहीं है। प्रवासियों के मन में लॉकडाउन का खौफ लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्रप्रदेश के लोग अपने घरों को लौट रहे हैं।
ट्रेन में अपने बच्चों के साथ झारखंड के पलामू के रहने वाले शंकर ने बताया कि अपनी पत्नी चंपा व बच्चों के साथ गांव जा रहे हैं। यहां गैस की पाइप लाइन की फिटिंग का काम करते हैं। वह दस साल से हिसार में रह रहे हैं। पिछले साल 5 महीने कोरोना संकट में हिसार में फंसे रहे तो खाने की दिक्कत हो गई थी। इस बार गांव जाना चाहते हैं। दस दिन पहले ही टिकट बुक करा लिया था।
आंध्रप्रदेश, तेलंगाना के 23 विद्यार्थियों का दल भी ट्रेन में सवार होते दिखा, जिसमें छात्राएं भी शामिल थीं। इन युवाओं ने बताया कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीएससी, बीटेक के छात्र हैं। पिछले सप्ताह ही कॉलेज बंद हो गया तो संस्थान ने हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए। एक सप्ताह तक हमें रिजर्वेशन नहीं मिला। आज की बुकिंग हुई थी। जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहते हैं।
सीढ़ियों से उतरते हुए ट्रेन की ओर जा रहे लखनऊ के निवासी राजन शर्मा ने बताया कि उनका पूरा परिवार हिसार में काम के लिए आया था। अब गेहूं की कटाई का काम हो चुका है। मंडी में इस बार काम नहीं मिल पा रहा। ऐसे में घर लौटने का फैसला किया है। दिल्ली में लॉकडाउन की बात सुनकर अब जल्द घर पहुंचना चाहते हैं।
सामान के साथ अपने प्रदेश को लौटते प्रवासी। संवाद- फोटो : Hisar
झारखंड के पलामू के लिए पिता शंकर के साथ रवाना हो रहे रजनेश, गीतांश। - फोटो : Hisar
एक निजी यूनिवर्सिटी में बीएससी, बीटेक के छात्र हैदराबाद, तेलंगाना जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर पहु- फोटो : Hisar