हिसार। मानव जीवन में ध्यान और विश्राम का महत्व समझाने एवं ध्यान साधना का अभ्यास करवाने के उद्देश्य से ओशो ध्यान उपवन में रविवार को ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। इस ध्यान सत्र में विभिन्न क्षेत्रों से काफी संख्या में साधकों ने हिस्सा लिया। स्वामी संजय और मां सांची ने ध्यान विधियों से रूबरू करवाते हुए उन्हें दिनचर्या में अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान साधकों को 10 व 11 दिसंबर को आयोजित होने वाले ओशो जन्मोत्सव के लिए भी आमंत्रित किया गया।
स्वामी संजय ने साधकों को बताया कि ध्यान ऐसी अवस्था है जिसमें कोई क्रिया या विचार नहीं होता। यह ऐसा साक्षी भाव है जो स्वयं को अभिव्यक्ति होने देता है। इसके साथ ही विश्राम इंसान को बाहरी दुनिया की अपेक्षा अपनी आंतरिक दुनिया की ओर मोड़ने में मदद करता है। जब साधक अपनी चेतना में सचेत रूप से विश्राम करता है तो वह विचारों और भावनाओं के प्रवाह को देख सकता है और अपने अस्तित्व के केंद्र में जा सकता है।
उन्होंने ध्यान और विश्राम मनुष्य की दशा व दिशा बदलने में कारगर उपाय है। ऐसा करने से मनुष्य तनाव रहित होकर खुशनुमा जीवन व्यतीत कर सकता है। स्वामी संजय व मां सांची ने साधकों के साथ 30 नवंबर के एक दिवसीय ध्यान शिविर की जानकारी साझा की। शिविर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक जारी रहेगा।