पार्षद जगदीश गुलाटी ने नगरपालिका बरवाला के एमई पर बड़े पैमाने पर घपले करने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि स्थानीय निकाय विभाग के डायरेक्टर द्वारा जारी पत्र के अनुसार सभी टेंडर निक ई प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर ही लगाए जा सकते हैं। मगर नगर पालिका ने तमाम नियमों को ताक पर रखते हुए करोड़ों रुपये के टेंडर पुराने सिस्टम के अनुसार ही लगा दिए, जबकि सभी नगर पालिकाओं और निगमों में उपरोक्त पोर्टल काफी पहले से ही शुरू हो चुका था।
चूंकि इस पोर्टल में मिलीभगत की गुंजाइश न के बराबर है। पुराने सिस्टम में दस्तावेज कार्यालय में ही जमा करवाने होते हैं। इसमें कोई दूसरी फर्म आती है तो उसे पहले रिक्वेस्ट द्वारा फिर दबाव डालकर और फिर भी ना माने तो उसे कुल राशि का दो से तीन प्रतिशत देकर एक पत्र लिखवा लिया जाता है कि उसके दस्तावेज समय पर नहीं पहुंचे। इसलिए यह टेंडर खोल दिया जाए, उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रकार नगर पालिका बरवाला का एक एमई नगर पालिका में मनमाने तरीके से लंबे समय से मिलीभगत का खेल खेलता रहा है।
विज ने दिए थे जांच के आदेश
पार्षद ने आरोप लगाया था कि इस अधिकारी ने भ्रष्टाचार की तमाम हदें पार कर दी। इसलिए इसके सभी कार्यों की पारदर्शी तरीके से जांच की जाए और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस पत्र के आधार पर अनिल विज ने जांच के आदेश दिए थे। अब उसी मामले में यह जांच जिला नगर आयुक्त को सौंपी गई थी। उन्होंने जांच के लिए मुख्य अभियंता नगर निगम हिसार को नियुक्त किया। इसके बाद दो सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई थी। इसमें सहायक अभियंता प्रवीण गंगवानी और कनिष्ठ अभियंता नगर निगम हिसार अंकुर को नियुक्त किया गया था। कार्यकारी अभियंता ने मामले की शिकायत करने वाले पार्षद जगदीश गुलाटी को भी 8 फरवरी को शिकायत से संबंधित दस्तावेज लेकर प्रस्तुत होने के आदेश दिए थे।