मेयर की कुर्सी को लेकर शहर में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। व्यापारियों से लेकर राजनीति से जुड़े लोग लगातार इस बात को लेकर चर्चाएं कर रहे हैं। इस मामले के बाद कई पार्षद भी सक्रिय हो गए हैं। एक दूसरे के पास मैसेज भेजने शुरू हो चुके हैं। पार्षद गुपचुप तरीके से एक दूसरे का मन टटोलने में लगे हैं। शहर में इस तरह की चर्चाएं चल रही हैं यह बात मेयर के सामने भी आ चुकी है। हालांकि मेयर ने अपने कार्यालय में इस बात पर कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी।
एक विशेष समुदाय की थी प्रतिक्रिया
निगम में मेयर के सामने बैठे एक पार्षद ने मेयर को यह बताया कि एक महिला पार्षद का नाम एक विशेेष समुदाय में चल रहा है। इस पार्षद को मेयर बनाया जा सकता है। विशेष समुदाय के लोगों ने इसके लिए समय भी बताया है। तीन महीने के अंदर-अंदर मेयर बदले जाने के वायदे तक किए जा रहे हैं।
समय बताएगा असलियत क्या
मेयर तो इस मामले पर पहले ही बोल चुकी हैं कि समय बताएगा। फिलहाल मेयर शकुंतला राजलीवाला की कुर्सी मजबूत है। अगर अविश्वास आता है तो इसे पूरा करने के लिए 15 वोटों की जरूरत है।
उधर कांग्रेसी पार्षदों में भी हलचल
इस मामले के बाद कांग्रेसी पार्षदों में भी जबरदस्त हलचल हो गई है। वे दूसरे पक्ष की रणनीति जानने के प्रयास कर रहे हैं। कुछ पार्षदों का मन भी मेयर बदलने का पक्षधर है। मगर जब तक अविश्वास नहीं आ जाता वे खुलकर अपना पक्ष रखने को तैयार नहीं हैं।
मेयर बदलने के लिए चल रही चर्चाएं कोरी अफवाह हैं। मेयर की कुर्सी चट्टान की तरह मजबूत है। चेयर पर मेयर शकुंतला राजलीवाला ही रहेंगी। जो लोग मेयर बदलने की बात कह रहे हैं वे केवल पब्लिसिटी पाना चाहते हैं और कुछ नहीं।
- नरेंद्र शर्मा, पार्षद
मेयर को बनाना व हटाना पार्षदों के हाथ में हैं। अगर पावर है तो ला कर दिखाएं अविश्वास। यूं स्टेज पर किसी के बोलने से मेयर नहीं बदलेगी। पार्षदों का साथ है, मेयर यहीं रहेंगी।
- दयानंद सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर