इस वर्ष की पहली शहनाई शुक्रवार से गूंज उठेगी। 14 जनवरी रात 1.26 बजे मलमास हट जाएगा और इस साल का पहला सावा 15 जनवरी को है। हालांकि इस वर्ष अन्य वर्षों की तुलना में विवाह के शुुभ मुहूर्त बहुत ही कम हैं।
इसलिए इस साल यदि आप शादी करने की सोच रहे हैं तो फटाफट तैयारी कर लें। जनवरी से अप्रैल तक कम ही मुहूर्त हैं। इसके बाद 28 अप्रैल से नौ जुलाई तक शुक्र तारा अस्त होने और 15 जुलाई को देव सोने के कारण शहनाई नहीं बज पाएगी।
इन महीने खामोश रहेगी शहनाई
मई-जून में शुक्र अस्त होने के कारण और 28 अप्रैल से 9 जुलाई तक देव शयन होने के कारण शहनाइयां खामोश रहेंगी। साथ ही 17 सितंबर से तीस सितंबर तक श्राद्ध पक्ष रहेगा।
नौ सितंबर से सात अक्तूबर तक गुरू अस्त रहने से 11 नवंबर से शहनाई गूंजेंगी। हालांकि कुछ समाजों में देव शयन और शुक्र अस्त को नहीं माना जाता है। उनके लिए कोई बंधन नहीं रहेगा, लेकिन अधिकांश समाज श्राद्ध, शुक्र अस्त और देव शयन को मानते हैं। इस दौरान शादी नहीं होगी।
मई-जून में एक भी सावा नहीं
सामान्यता हर वर्ष 50 से 65 विवाद के लग्न मिल जाते हैं। लेकिन इस वर्ष मुहूर्तों की संख्या काफी कम है। हालांकि सभी पंडितों की अलग-अलग राय है।
कुछ पंडित इस वर्ष विवाह के लिए 41 मुहूर्त बता रहे हैं। वहीं कुछ 29 ही शुभ मुहूर्त बता रहे हैं। सामान्यता मई व जून को वैवाहिक सावों का महीना माना जाता है, लेकिन शुक्र अस्त होने से इन दोनों ही महीनों में विवाह मुहूर्त नहीं है।
दस रेखीय विवाह का मुहूर्त भी नहीं
इस वर्ष जहां विवाह के लग्न मुहूर्त कम हैं वहीं दस रेखीय विवाह का एक भी मुहूर्त नहीं है। जहां मुहूर्त के हिसाब से दस गुण मिलते हैं उसे दस रेखीय विवाह मुहूर्त कहा जाता है। जहां नौ गुण मिलते उसे नौ रेखीय विवाह मुहूर्त कहा जाता है।
जो समाज मुहूर्त को देखकर विवाह करते हैं उनके लिए इस वर्ष बहुत ही कम विवाह लग्न के मुहूर्त हैं। 28 अप्रैल से नौ जुलाई तक शुक्र अस्त, 15 जुलाई से 11 नवंबर तक देव शयन होने, 17 सितंबर से तीस सितंबर तक श्राद्ध पक्ष और नौ सितंबर से सात अक्तूबर तक गुरू अस्त होने से विवाह लग्न के मुहूर्त नहीं है। हालांकि जो इन्हें नहीं मानते उनके लिए कोई परेशानी नहीं।
- आचार्य सुधीर वशिष्ठ