कार फ्री डे के आइडिया की वकीलों ने भी सराहना की है। हमने शहर के कई वकीलों से इस मुद्दे पर बात की। इन वकीलों ने इसे बेहतर बताते हुए शहर में भी इस पर अमल की बात कही है।
वहीं सांसद दुष्यंत चौटाला ने भी कार फ्री डे की सराहना की है। उन्होंने कहा कि वे इसे लागू करने के पक्ष में हैं। क्योंकि इससे एक तरफ जहां ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार होगा वहीं आम जनता को आर्थिक फायदा भी होगा। साथ ही प्रदूषण भी कम होगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता दलीप जाखड़ का कहना है कि शहर में हफ्ते में कार फ्री डे होना चाहिए। इससे पोल्यूशन कम होगा और भीड़भड़ाका नहीं होगा। यह हफ्ते में संभव है तो ठीक है, वर्ना महीने में तो जरूर होना चाहिए।
अब आलम यह है कि वाहन खड़ा करने के लिए शहर में जगह मुश्किल से मिलती है और बेतरतीब खड़े वाहनों से अव्यवस्था का आलम रहता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल का कहना है कि यह अच्छी पहल है। सप्ताह में एक दिन कार फ्री डे होना चाहिए। इससे शहरवासियों को प्रदूषण से राहत मिलेगी। लोगों को साइकिल या पैदल चलने का अभ्यास हो जाएगा।
थोड़ी दूरी पर ऑफिस या संस्थान होने पर भी काफी आदमी कार और वो भी अकेले लेकर जाते हैं। जबकि वह 5 मिनट में पैदल पहुंच सकते हैं। यह अच्छी मुहिम होगी। इससे फायदा ही फायदा होगा।
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेंद्र ढुल का कहना है कि पहले इसका ट्रायल लिया जाना चाहिए। सफल होने पर लागू कर देना चाहिए। क्योंकि कार या वाहन खराब होने पर भी तो लोग काम चलाते हैं। हम भी वातावरण के प्रदूषण रहित होने के पक्षधर हैं। इससे सबको फायदा होगा।
अधिवक्ता हर्षवर्धन शर्मा का कहना है कि ऐसा महीने में तो होना ही चाहिए। यदि हफ्ते में होता है तो इससे ज्यादा अच्छी बात भला क्या होगी। इसके लागू होने से वातावरण प्रदूषण रहित होगा। इसके अलावा पेट्रोल डीजल की बचत होगी। बाकी हर आदमी का अपना नजरिया है।
अधिवक्ता सोनिया गुप्ता का कहना है कि मैं पर्सनल तौर पर इसके हक में हूं। हफ्ते में कोई दिन फिक्स होना चाहिए। साइकिल पर या पैदल चलने से लोग सेहतमंद रहेंगे। इसके फायदे ही फायदे हैं, नुकसान कोई नहीं।
बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव अधिवक्ता अमित सैनी का कहना है कि यह समाज के हर वर्ग के लिए फायदेमंद रहेगा। यह तो आम के आम और गुठलियों के दाम वाली कहावत को साबित करेगा। लोग सेहतमंद होंगे, पेट्रोल डीजल के पैसे बचेंगे और वातावरण प्रदूषण मुक्त होगा।