चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के अनुसार, वीरवार अलसुबह से 26 जून तक हरियाणा के उत्तर और दक्षिणी भागों में मानसूनी हवाओं के कारण गरज-चमक और हवाओं के साथ व्यापक बारिश होने की संभावना है। डॉ. मदन खिचड़ ने बताया 26 जून के बाद मानसूनी टर्फ रेखा हिमालय की तलहटियों और उत्तर पूर्व की तरफ बढ़ने की संभावना को देखते हुए 26 जून के बाद प्रदेश में मानसूनी हवाएं कमजोर होने की संभावना है। इससे प्रदेश में 27 जून से 29 जून के बीच मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने, आंशिक बादल छाने और उत्तरी हरियाणा में कुछ जगहों पर छिटपुट बूंदाबांदी की संभावना है। इस दौरान प्रदेश में तापमान सामान्य या इसके आस-पास रहेगा।
हवाओं ने दी राहत, आज बारिश के आसार
मौसम में परिवर्तन जारी है। बुधवार को सुबह से कड़ी धूप निकली रही, लेकिन रुक-रुक कर चल रही हवाओं ने कुछ हद तक लोगों को गर्मी से राहत दी। दोपहर बाद कहीं-कहीं आंशिक बादल छाए रहे। हालांकि बुधवार को अधिकतम तापमान 1.2 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 38.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं, न्यूनतम तापमान में भी मामूली बढ़ोतरी हुई और यह 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार अब वीरवार अलसुबह से ही मौसम में परिवर्तन होगा, जिसके कारण आगामी दो दिन बारिश के आसार हैं।
मानसूनी हवाओं के कारण उत्तरी हरियाणा में हुई बारिश
दक्षिण पश्चिम मानसून एक सप्ताह के अंतराल के बाद अनुकूल परिस्थितियों के कारण 22 जून से आगे बढ़ना शुरू हुआ। 24 जून यानी बुधवार को मानसून की उत्तरी सीमा राजस्थान के क्षेत्र पर पहुंची। दक्षिण पश्चिमी मानसून ने गुजरात, मध्य प्रदेश, दक्षिण पूर्व राजस्थान, उत्तर प्रदेश के अधिकतर भागों, चंडीगढ़, उत्तरी पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मूू कश्मीर में बारिश करते हुए आगे बढ़ा। इन्हीं मानसूनी हवाओं के कारण बुधवार को उत्तरी हरियाणा के कई जिलों यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला, चंडीगढ़, करनाल, कुरुक्षेत्र में भी बारिश हुई।
मौसम आधारित कृषि सलाह
- अगले दो दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए धान की रोपाई जारी रखें।
- आगामी दो दिनों में अच्छी बारिश होने पर या उचित नमी होने पर खेत तैयार कर उत्तम किस्मों के बीजों से ग्वार, बाजरा आदि की बिजाई मौसम साफ होने पर कर दें।
- नरमा-कपास में बारिश का पानी ज्यादा देर तक न खड़ा रहने दें और मानसून सीजन को देखते हुए नरमा-कपास के खेतों में जलनिकासी का प्रबंध कर लें।
- हवा में बदलाव की संभावना को देखते हुए राजस्थान के आस-पास के जिलों के किसान टिड्डी दल के प्रति सजग रहें और खेतों में निगरानी रखें। खेत में कहीं भी टिड्डी दिखाई दे तो नजदीक के कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र को सूचित करें।