हिसार। नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में जिला अदालत ने वीरवार को दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) सुनील जिंदल की अदालत ने 55 हजार का जुर्माना लगाया है। दोषी युवक सामाजिक तौर पर पीड़िता का भाई लगता है।
पीड़िता के वकील ने बताया कि इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई थी और मामला दर्ज होने के दो महीने बाद ही बच्ची को जन्म दिया था। मामले में पिता, दोषी और नवजात बच्ची के डीएनए का मिलान हो गया था। इसके आधार दोषी बायोलॉजिकल पिता साबित हुआ।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की तरफ से पीड़िता को 4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है। दोषी पर लगाए गए 50 हजार रुपये का जुर्माना भी पीड़िता को दिया जाएगा। यह मामला जनवरी 2019 में दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
घटना के दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई थी। नाबालिग पीड़िता ने बयान दिए थे कि उसने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की है और उसके माता-पिता का निधन हो चुका है। वह अपने दादा-दादी और चाचा के साथ रहती है। पीड़िता ने बताया कि गांव का एक लड़का उनके घर आता-जाता था और उसके साथ छेड़खानी करता था।
16 अप्रैल 2018 को आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और धमकी दी कि यदि उसने किसी को बताया तो उसे और उसके परिवार को जान से मार देगा। धमकी के डर से पीड़िता ने किसी को कुछ नहीं बताया। इसके बाद भी आरोपी ने लगातार दो-तीन महीने तक उसके साथ गलत काम किया। 14 जनवरी 2019 को जब उसकी बुआ घर आईं तो वे उसे अस्पताल ले गईं। वहां जांच में पता चला कि पीड़िता गर्भवती है। इसके बाद पुलिस को शिकायत दी गई और बयान के आधार पर कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया गया। जिला अदालत ने दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है।
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