करीब 6 वर्षों के बाद लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को मिली जमीन पर रविवार को शिलान्यास पत्थर रखा जाएगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के स्वयं के कैंपस का निर्माण शुरू हो जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि करीब अगले दो वर्षों में यह विश्वविद्यालय मूर्त रूप ले लेगा, जिससे विश्वविद्यालय के पंखों को अपनी नई उड़ान मिलेगी।
लुवास की स्थापना 2010 में हुई थी। एचएयू के वेटरनरी कॉलेज को एचएयू से अलग कर यह यूनिवर्सिटी बनाई गई थी। यूनिवर्सिटी अब एचएयू कैंपस के भवनों में ही कार्य कर रही है। जब से यूनिवर्सिटी बनी तब से इसके अपने कैंपस के लिए जगह की तलाश की जा रही थी। कई जगहों पर जमीन मिली, लेकिन किसी न किसी कारण से वो कैंसल कर दी जाती रही। अब हाल ही में कैबिनेट ने आरडीएस फार्म की 1125 एकड़ जमीन पर मुहर लगाई थी। रविवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इसका उद्घाटन करेंगे।
कई बार बदली गई जमीन
विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद इसकी जमीन के लिए तलाश शुरू हुई। सबसे पहले धांसू रोड पर जमीन अलॉट की गई। इसके बाद चंडीगढ़ रोड पर जमीन दी गई। लेकिन एयरपोर्ट के कारण दोनों जगहों पर मिली जमीन कैंसल हो गई। इसके बाद एचएयू में गंगवा ब्लॉक वन और टू की जमीन दी गई। लेकिन एक बार फिर यह सिरे नहीं चढ़ पाई। इस जमीन को लेकर विश्वविद्यालय में भी खूब विवाद हुआ। अंत में लुवास्ता प्रधान जगवीर रावत के सरकार को दिए गए प्रस्ताव पर आरडीएस फार्म पर 1125 एकड़ जमीन मिली, जिस पर रविवार को मुख्यमंत्री उद्घाटन करेंगे।
2010 में बना विश्वविद्यालय
सन 1948 में पशु चिकित्सा महाविद्यालय को लाहौर से हिसार में स्थानांतरित किया गया। सन 1971 में यह चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का भाग बन गया। इसके बाद 2010 में इसे अलग करके लाला लाजपत राय विश्वविद्यालय बना दिया गया।
पशुओं की हर बीमारी का इलाज यहां
लुवास विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सालय को पूरे हरियाणा में जाना जाता है। प्रदेश भर से गंभीर रूप से बीमार पशुओं को पशुपालक यहां लाते हैं। अस्पताल में पशुओं की सर्जरी, ऑपरेशन आदि से लेकर हर तरह का इलाज होता है। विवि में पशुओं के इस बड़े चिकित्सालय के अलावा क्लीनिक, सेंट्रल लेबोरेट्री, एनिमल रिसर्च फार्म और डिजीज फ्री स्मॉल एनिमल हाउस आदि प्रमुख सुविधाएं हैं।
ग्रेजुएशन, पीजी और पीएचडी की होती है पढ़ाई
लुवास में पशुचिकित्सा व पशु विज्ञान से जुड़े कई कोर्स करवाए जाते हैं। वेटरिनरी कॉलेज में बीवीएससी, एमवीएससी और पीएचडी की डिग्रियां करवाई जाती हैं। वहीं डेयरी टेक्नोलॉजी कॉलेज में बीटेक इन डेयरी साइंस का कोर्स करवाया जाता है। इसके अलावा दो वर्षीय वेटरनिरी डिप्लोमा सहित कई अन्य कोर्स करवाए जा रहे हैं।