विलायती गाय के ए 1 और देसी गाय के ए 2 दूध के बीच फर्क पता करने के लिए लुवास एक किट तैयार कर रहा है। इससे लोग घरों में बैठकर ही पता लगा सकेंगे कि दूध देसी गाय का है या विलायती गाय का। इस तकनीक को विकसित करने के पीछे लुवास का मकसद देसी गाय का संवर्द्धन व संरक्षण करना है। लुवास वैज्ञानिकों की मानें तो किट बनाने के साथ ही कुछ अन्य तथ्य भी रिसर्च में निकलकर सामने आएंगे, जिससे देसी गाय के दूध की वैल्यू और गाय की उपयोगिता बढ़ जाएगी।
लुवास के वैज्ञानिकों के मुताबिक लोग ए 1 और ए 2 दूध के बारे में तो जानते हैं, लेकिन इसका पता लगाने के लिए कोई बेहतर तकनीक नहीं है। इसलिए लोग देसी और विलायती गाय के दूध में फर्क पता नहीं कर सकते। लेकिन अब लुवास इसका पता लगाने के लिए एक किट तैयार कर रहा है। लुवास के अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंद्र शर्मा के ने बताया कि लुवास के पास वो तकनीक तो है जिससे पशु का पता लगाया जा सकता है कि वह ए 1 गुणों वाला दूध देता है या ए 2 दूध। लेकिन ए 1 और ए 2 दूध को जांचने के लिए कोई तकनीक नहीं है। लुवास इसी तकनीक को विकसित करने के लिए काम कर रहा है।
एक एमिनो एसिड का होता फर्क
डॉ. शर्मा के अनुसार ए 1 और ए 2 दूध में बहुत कम फर्क होता है। इसका केमिकली तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। दोनों दूध में केवल एक एमिनो एसिड का ही फर्क होता है। लेकिन यह फर्क ही दूध में एक तरह से औषधि का काम करता है। दोनों तरह के दूध का स्वास्थ्य के लिए अलग-अलग गुण हैं। देश विदेश में हुए विभिन्न शोधों से यह सामने आया है कि देसी गाय का ए 2 दूध कई रोगों का रामबाण इलाज है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार देसी गाय का ए 2 दूध पीने से हार्ट अटैक और डायबिटीज की बीमारी की संभावना कम रहती है। दूध की इन सब विशेषताओं को देखते हुए ही लुवास के वैज्ञानिकों ने दूध की पहचान करने वाली किट पर रिसर्च शुरू की है।
हम ए 1 और ए 2 दूध में फर्क बताने वाली किट पर काम रहे हैं। इससे पहले हमारे पास पशुओं को जांचने की तकनीक है, जिससे पता लगाया जा सकता है कि पशु ए 1 दूध देता है ए 2 दूध। किट को लेकर रिसर्च चल रही है। जल्द ही अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।
- डॉ. रवींद्र शर्मा, अनुसंधान निदेशक, लुवास, हिसार